लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सीवीटीएस विभाग में लंग व हार्ट में अब वीडियो असिस्टेंट थोरेसिक सर्जरी (वेट्स) तकनीक से जटिल सर्जरी की जा सकेगी। अभी तक सीटी स्कैन व एनएफएसी की जांच में गांठ या ट¬ूमर नहीं दिखायी देते थे। वह अब इस तकनीक की सर्जरी से आसानी से निकाले जा सकेंगे। इस तकनीक का प्रयोग विभाग के विशेषज्ञ डाक्टरों ने शुरू कर दिया है।
सीवीटीएस विभाग के वरिष्ठ डा. शैलेन्द्र कुमार बताते है कि वीडियो असिस्टेंट थोरेसिक सर्जरी (वेट्स) तकनीक से लंग व हार्ट सर्जरी की नयी तकनीक है। इस प्रयोग सीवीटीएस विभाग में जल्द ही शुरु किया गया है। डा. शैलेद्र ने बताया कि अक्सर सीटी स्कैन, सीटी एंजियोग्राफी या एनएफएसी की जांच से भी लंग में ट्यूमर या गांठ का नहीं चल पाता है। ऐसे में वेट्स तकनीक से न सिर्फ गांठ या ट्यूमर पता लगाया जा सकता है, बल्कि इस तकनीक के प्रयोग से उसे निकाला भी जा सकता है। इस तकनीक के प्रयोग से मरीज को बहुत कम दिक्कत होती है आैर सीधे गांठ या ट्यूमर को निकाल दिया जाता है। इससे चेस्ट में दिक्कत, इम्पाइमा या लंग के बीच में कई दिक्कतों को दूर दिया जा सकता है।
इस तकनीक से हार्ट में पेरीकाडियल नामक बीमारी की सर्जरी की जा सकती है। इसके साथ ही आंत में इंसोफेगस में इस तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है। डा. शैलेद्र ने बताया कि अभी इस तकनीक का प्रयोग सर्जरी में सफलता पूर्वक विभाग में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके साथ डा. अम्बरीश भी इस तकनीक से सर्जरी कर रहे है। उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र में तकनीक से लाखों रुपये में सर्जरी की जाती है आैर उनके यहां मात्र कुछ हजार में ही इस तकनीक से सर्जरी की जा रही है।
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