डेस्क। डब्ल्यूएचओ ने भारत बायोटेक के टाइफाइड के टीके टाइप बार टीसीवी को अपनी मंजूरी दे दी है। विशेषज्ञों के अनुसार इस टीके की वर्तमान में अन्य टीकों के मुकाबले लंबे समय के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता है तथा इसके कुछ ही टीके लगवाने की आवश्यकता होती है। इसे छह महीने की आयु के बाद भी लगवाया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ की अनुमति के बाद से स्वास्थ्य एवं मानवीय संगठन जैसे कि यूनीसेफ, गावी आैर पैन-अमेरिकन हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के दुनियाभर में जनस्वास्थ्य टीकाकरण के लिए इन्हें खरीदने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
डब्ल्यूएचओ के जारी एक बयान में कहा, डब्ल्यूएचओ से टीके को मंजूरी मिलने का मतलब है कि यह गुणवत्ता, सुरक्षा आैर क्षमता के मानकों पर स्वीकार्य है। इससे अब यूनीसेफ आैर गावी जैसी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां इसे खरीद सकती हैं।
अक्तूबर 2017 में टीकाकरण पर रणनीतिक सलाहकार विशेषज्ञ समूह ने टीसीवी को सिफारिश की कि उन देशों में छह माह की आयु से ऊपर के बच्चों के लिए नियमित इस्तेमाल किया जाए, जहां टाइफाइड की महामारी है। बताते चले कि टाइफाइड दूषित भोजन आैर जल से होने वाली गंभीर बीमारी है आैर कभी-कभी यह जानलेवा हो जाती है। टाइफाइड के लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, पेट में दर्द आैर डायरिया या कब्ज शामिल है।












