लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ डा. जिलेदार रावत के नेतृत्व में अन्य डॉक्टरों की टीम ने बुधवार को जन्म से अविकसित डायाफ्राम बच्चे की जटिल सर्जरी की। करीब तीन घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद एक वर्षीय बच्चे को नया जीवनदान मिल गया। डा. रावत के मुताबिक डायाफ्राम अविकसित न होने से बच्चे के फेफड़े में ऑक्सीजन आपूर्ति होने में दिक्कत थी।
डॉ. रावत ने बताया कि 15 दिन पहले विभाग की ओपीडी में एक वर्षीय आयरन को लाया गया था। उसके परिजनों ने बताया था कि बच्चे को सर्दी- जुखाम बना रहता है।
तमाम दवा करने के बाद भी ठीक नही होता है। इस बीच तीन बार निमोनिया भी हो चुका है। उन्होंने जांच के लिए बच्चे के चेस्ट का एक्सरे करवाया। एक्सरे में जो देखा वह काफी चौकाने वाला था। बच्चे के फेफड़े और लिवर के बीच में जो डायाफ्राम होता है। यह डायाफ्राम ठीक से विकसित नहीं हो सका था।

इस कारण लिवर अपनी जगह से खिसक कर फेफड़े तक पहुंच गया था, जिससे दबाव बनने से फेफड़ा सिकुड़ गया था, जिससे वजह से बच्चे को सर्दी जुखाम और निमोनिया की समस्या बनी रहती थी। इसके साथ ही उसको सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी। डा. रावत ने इस दिक्कत को ठीक करने के लिए सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।
डॉ.रावत ने बताया कि सर्जरी में बच्चे का दाहिनें ओर का फेफड़े को चीरा लगाकर खोल दिया गया। इसके बाद डायाफ्राम तक पहुंच चुके लिवर को खिसका कर उसके स्थान पर पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि सूचर की एक जाली बनाकर डायाफ्राम के चारों से जोड़ा गया, ताकि उसमें मजबूती आ जाए आैर ऑक्सीजन की आपूर्ति ठीक से हो सके। इसके बाद फेफड़े के सिकुडन को खत्म कर दिया गया था।
डॉ.रावत ने बताया कि क्लीनकल देखा जाए तो बच्चों को सीने के बाएं तरफ समस्या होती है। लेकिन इसमें दहिनी तरफ समस्या थी, जिससे लिवर भी अपनी जगह से खिसक गया था। इस कारण लिवर में भी संक्रमण होने का खतरा बन गया था। डा. रावत ने बताया कि इस तरह के मामला एक हजार में से एक होता है। डा. रावत ने बताया कि निजी अस्पताल में इस जटिल सर्जरी में लगभग चालीस हजार रुपये का खर्च आता, लेकिन केजीएमयू में लगभग दस हजार रुपयों के खर्च में यह सर्जरी हो जाएगी।












