बोले प्रो. बीएम हेगड़े… मरीजों से सिम्पैथी जरूरी

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लखनऊ। मरीज का एलोपैथी, होम्योपैथी सहित अन्य पैथी से इलाज किया जाता है, पर उसको सबसे ज्यादा आश्वयकता सिम्पैथी की होती है। अगर इलाज के साथ यह डाक्टर अपने व्यवहार में शामिल कर ले, तो इलाज में कोई दिक्कत नहीं होगी। यह उद्गार वल्र्ड एकेडमी ऑफ आथेंटिक हीलिंग साइसेंज कर्नाटक के चैयरमेन पद्मभूषण प्रो. बीएम हेगड़े ने किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के 13 वें दीक्षांत समारोह में व्यक्त किये। समारोह में कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक ने मेडिकोज में छात्राओं के अधिक मेडल्स प्राप्त करने पर महिला सशक्तीकरण को प्रबल होने पर खुशी जतायी।

समारोह में मानद उपाधि पैथालॉजी एण्ड लैबोरेटरी मेडिसिन , माइक्रोबायोलॉजी एण्ड मालीक्यूलर जेनेटिक्स , प्रमुख बेसिक एण्ड क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी प्रो. सुधीर गुप्ता तथा नेशनल कैंसर इंस्टीटि¬ूट प्रमुख प्रो. जी के रथ को प्रदान की गयी। इसके अलावा समारोह में राज्यपाल ने एमबीबीएस के 31 व बीडीएस के तीन मेधावियों को गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इसमें अपराजिता चतुर्वेदी को प्रतिष्ठित हीवेट गोल्ड मेडल, चासंलर मेडल तथा विश्वविद्यालय आनर्स मेडल से सम्मानित किया गया।

कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. हेगड़े ने कहा कि वर्तमान में डाक्टर को संवेदनशील होना चाहिए। संवेदनशील मरीजों को अगर डाक्टर संवदेनशीलता से इलाज करता है। मरीज वैसे भी डाक्टर को भगवान का दर्जा दे रखा है, इसमें संवेदनशीलता से देखा जाए तो डाक्टर किसी भी बीमारी का सफल इलाज कर सकता है। उन्होंने कहा कि डिग्री मिलने से आपका सफर समाप्त नही हुअा बल्कि शुरू हुआ है। यह डिग्री नहीं लाइसेंस है जो कि अापको ज्यादा सीखने का मौका देता है।

साइंस का अर्थ बदल रहा है, पहले साइंस को खोज कहा जाता था ,अब साइंस बिजनेस हो गया है।यह लोग अपने जीवनकाल का महत्वपूर्ण पहलुओं को आपको देते हुए मुकाम पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका रखते है। कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि समारोह में मेधावियों को दिये जाने वाले मेडल्स में लड़के व लड़कियों का प्रतिशत को देखा, तो लड़कियों का प्रतिशत दो गुना से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिशत महिला सशक्तीकरण के बढ़ने का एक आैर कदम है। उन्होंने डाक्टरों से कहा कि मेडिकल की पढ़ाई वाकई बहुत कठिन है। आप इस मुकाम पर है आैर आगे भी इच्छा शक्ति से मुकाम पायेंगे। उन्होंने कहा कि केजीएमयू के डाक्टर पहले विश्व पटल पर अपनी प्रतिभा के लिए जाने जाएंगे। मानक उपाधि प्राप्त डा. सुधीर गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में शोध पर ध्यान देना होगा।

उद्घाटन के बाद कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने स्वागत सम्बोधन के बाद केजीएमयू की उपलब्धियों का गिनाया। समारोह में डीन डा. विनीता दास, डा. शादाब मोहम्मद, डा. विनोद जैन सहित अन्य वरिष्ठ मौजूद थे। समारोह में धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव ने किया।

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