इलाज के दौरान होने वाले संक्रमण से मरीज पर पड़ता है आर्थिक दबाव :डा.राजेश

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जिला अस्पतालों को हालत खराब है। अस्पताल में संक्रमण रोकने के मानकों पर ज्यादा काम नहीं हो पा रहा है। इसका एक कारण वहां पर मरीजों का भारी दबाव भी है। एक चिकित्सक को एक दिन में सैकड़ों मरीज देखने पड़ते हैं। ऐसे में अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों में संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है। हालात यह है कि १० जिला अस्पतालों में से दो अस्पताल ही ८० प्रतिशत हॉस्पिटल एक्वायर्ड इंफेक्शन से बचाव के मानकों को पूरा करते हैं, जबकि ८ अस्पताल केवल २० प्रतिशत मानकों को पूरा कर रहे हैं। उक्त बातें पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा.राजेश हर्षवर्धन ने मंगलवार को एसजीपीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा अस्पताल से जुड़े संक्रमण की रोकथाम के लिए आयोजित कार्यशाला के दौरान पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये कही।

उन्होंने बताया कि अस्पताल जिला अस्पतालों में मरीजों का भारी दबाव होता है,इमरजेंसी से लेकर ओपीडी व ऑपरेशन थियेटर तक मरीजों का तांता लगा होता है। ऐसे में हॉस्पिटल एक्वायर्ड इंफेक् शन पर पूरी तरह से काम नहीं हो पाता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीज में संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले यूटीआई संक्रमण के सामने आते हैं,दूसरे नम्बर पर सर्जिकल,तीसरे नंबर पर सेप्टीसीमिया तथा चौथे नंबर पर वेंटीलेटर से होने वाले निमोनिया संक्रमण के देखे गये हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में इलाज के दौरान रुकने पर होने वाले संक्रमण से मरीज पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है। इसमें से कुछ संक्रमण का इलाज आसान होता है। वहीं कुछ संक्रमण मरीज के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालते हैं साथ ही उनका इलाज लम्बा चलता है।

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अस्पताल में होने वाले संक्रमण

  • यूटीआई संक्रमण से ग्रसित मरीजों की संख्या लगभग १५ से ३० प्रतिशत
  • सर्जिकल संक्रमण ७ से १५ प्रतिशत
  • सेप्टीशीमिया संक्रमण लगभग १० प्रतिशत

हाथ धुल कर हो सकता है संक्रमण से बचाव

डा.हर्षवर्धन के मुताबिक सिर्फ हाथ धुलकर अस्पताल में होने वाले एक तिहाई संक्रमण से बचाव हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों,तीमारदारों के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए,साथ ही हाथों की साफ-सफाई के प्रति लोगों को जागरुक करना चाहिए। जिससे हम अस्पताल में होने वाले संक्रमणों के अलावा कई बीमारियों से बच सकते हैं।

एसजीपीजीआई स्थित टेलीमेडिसिन प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यशाला में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.टीएन.ढोल,कार्यक्रम आयोजन सचिव एसोसिएट प्रोफेसर डा.रिचा मिश्रा तथा सीएमएस प्रो.अमित अग्रवाल उपस्थित रहे।

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