लखनऊ । चिकित्सा शिक्षा एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टण्डन ने ट्रांसमेडिकान 2017 कार्यशाला का दूसरे दिन उद्घाटन करते हुए कहा कि रक्तदान महा दान है । इस क्षेत्र में कार्य करने वालो को स्वैक्षिक रक्तदान करने के लिए समाज को जागरूक करना होगा। सारे ब्लड बैंक को डिजिटलाइज करना होगा।
कार्यक्रम में केजीएमयू के कुलपति प्रो एमएल बी भट्ट ने कहा कि रक्तदान की स्वैक्षिक रक्तदान को करने के लिए लोगों को जागरूक करने को आवश्यक बताया। उन्हों ने यह भी कहा कि किसी भी क्लिनिकल प्रैक्टिस या सर्जिकल प्रैक्टिस के साथ रक्तकोष का होना बहुत ही जरूरी है। प्रत्येक वर्ष 53 मिलियन ब्लड यूनिट की आवश्यकता होती है, किंतु हमे 28 मिलियन यूनिट रक्त हमे मिल पाता है। सभी मेडिकल कालेजों में रक्तकोष होना आवश्यक है।
मरीजो को नेट टेस्ट रक्त मुहैया कराया जाता है, कार्यक्रम में प्रो. विनोद जैन अधिष्ठाता पैरामेडिकल संकाय ने कहा कि पूरे प्रदेश में केजीएमयू में सबसे पहले नेट टेस्ट शुरू हुआ था। यहां के रक्त बैंक के पास सबसे ज्यादा स्वैक्षिक रक्त दाता है। केजीएमयू में सर्व प्रथम 1942 में रक्तदान शुरू हुआ था। कार्यक्रम में प्रो. शादाब मोहम्मद, अधिष्ठाता, दंत संकाय, प्रो . आशुतोष कुमार सहित देश विदेश से आये विभिन्न प्रतिभागी उपस्तिथ रहे। कार्यक्रम के अंत मे प्रो. तूलिका चंद्रा, विभागाध्यक्ष,ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।












