लखनऊ । दुनिया में लगभग दो प्रतिशत लोग सफेद दाग से पीड़ित है और समाज ऐसे लोगों को उपेक्षित दृष्टिकोण से देखता है। हालांकि, सफेद दाग छुआछूत की बीमारी नहीं है। यह बात विवेकानन्द अस्पताल के चर्मरोग विशेषज्ञ डा. अजय कुमार राय ने शनिवार को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने बताया कि विश्व सफेद दाग दिवस 25 जून को मनाया जाएग। इसका उद्देश्य से सफेद दाग के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना है। उन्होंने बताया कि भारत में इस चर्मरोग से ग्रसित लोगों की संख्या 4-5 प्रतिशत है जिसकों सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता है।
रोग का कारण बतातें हुए उहोने कहा कि सफेद दाग के मामले में त्वचा का रंग बनाने वाली कोशिकाएं मरने लगती है जिससे शरीर में उजले धब्बे बनने लगते है । इस रोग को विटिलगो, ल्यूकोडर्मा, फुलेरी या श्वेतपात के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि जब त्वचा का रंग हल्का पड़ने लगने लगे तो त्वचा रोग चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि शुरुआती चरण में इलाज से रोग पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। डा. अजय कुमार ने बताया कि सफेद दाग का खानपान से कोई सीधा संबंध नहीं है। अभी तक ऐसी रिसर्च नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि क्रोनिक इन्फेक्शन, लगातार गला या पेट खराब रहना, अनीमिया, थॉयराइड, डॉयबटीज, बर्थमार्क, केमिकल ल्यूकोडर्मा भी सफेद दाग का कारण हो सकता है । सफेद दाग छूने, चूमने या शारीरिक सम्बंध बनाने से नहीं फैलता है और मांस मछली खा कर दूध पीने से सफेद दाग होना निहायत ही मनगढ़ंत बात है। माइकल जैक्सन से लेकर चंद्बाबू नायडू, गौतम सिंघानिया तक सफेद दाग है लेकिन इनके कार्य करने की क्षमता में कोई कमी आई है।












