भूलने की समस्या का समाधान

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Photo Source: http://www.psychologyandi.com/

भूलने की आदत ज्यादातर लोगों को परेशान करती है। कोई नाम भूल जाता है तो किसी के दिमाग से अहम दिन व तारीखें फिसल जाती हैं। दिलचस्प तो यह है कि यह परेशानी बच्चे से लेकर बूढ़ों तक सबको होती है और इसको मेडिकल साइंस में कोई नाम तक नहीं दिया जा सका है। जाहिर है, इसके इलाज की बात करना बेमानी है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि कमजोर याददाश्त के चक्कर में आपको जीवनभर दूसरों की डांट-फटकार सुननी पड़ेगी। भले ही इसके लिए कोई खास दवा या घुट्टी न बनाई गई हो, लेकिन कुछ तरीके अपनाकर आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

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समस्या का रहस्य –

इस परेशानी की जड़ में जाकर असल वजह जानना बेहद जरूरी होता है। दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ. विशाल छाबड़ा अपने मरीजों को भी तनाव मुक्त रहने की सलाह देते हैं। वह कहते हैं, ‘यह कोई नई समस्या नहीं है। फर्क बस इतना है कि आज कल तनाव का स्तर कुछ ज्यादा बढ़ गया है। लोग गाड़ी चलाते हुए भी चार काम करते हैं। उन्हें फोन पर बात भी करनी है, गाड़ी की स्पीड भी देखनी है और ट्रैफिक से गाड़ी भी निकालनी है।  मेडिकल साइंस की बात करें तो हमारे दिमाग में कुछ खास सर्किट होते हैं जो जन्म से ही कम या ज्यादा हो सकते हैं। इसकी वजह से ही आई क्यू कम या ज्यादा हो सकता है। डॉ. छाबड़ा बताते हैं, ‘कम शब्दों में कहा जाए तो कमजोर मेमोरी की वजह इंफॉर्मेशन ओवरलोड है।

आसान है समाधान –

मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि मेमोरी की समस्या का समाधान लोगों को खुद ही करना चाहिए। इसके लिए, सबसे जरूरी यह है कि खुद को मरीज न समझें। जानकारों की मानें तो याददाश्त को तेज करने के तीन आसान तरीके हैं।

  • सबसे पहले तो समस्या का अहसास होते ही थायरॉयड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट कराना चाहिए। इससे पता चल जाता है कि कहीं यह समस्या थायरॉयड की वजह से तो नहीं है। क्योंकि, कई लोगों को ऐसी दिक्कत थायरॉयड से पेश आती है। रिपोर्ट निगेटिव आती है तो समझ लीजिए कोई खास दिक्कत नहीं है।
  • दूसरे, कोई भी काम करते समय पूरा ध्यान उसी पर केंद्रित रखिए। जल्दबाजी, हड़बड़ी और कंफ्यूजन में हम जो काम करते हैं, वह याद नहीं रहता।
  • तीसरा, हमेशा किसी रास्ते, फॉर्मूलेे, नम्बर या तारीख को पढऩे के बाद उसे 24 घंटे में कम से कम दो बार दोहराइए। क्योंकि जब कोई बात आपके सचेतन मस्तिष्क में बस जाती है तो वह आसानी से धुंधली नहीं होती।

इसीलिए, हर चीज को बार-बार याद करना जरूरी होता है। यह नियम बच्चों से लेकर नौकरी पेशा लोगों तक, सब पर लागू होता है। जानकार कहते हैं कि ट्रेनिंग के जरिए ही कमजोर याददाश्त में सुधार लाया जा सकता है। इसका कोई रेडिमेड फॉर्मूला
नहीं है।

योग से बढ़ाएं याददाश्त –

चैतन्य फाउंडेशन में योग गुरु योगी अनूप भी तनाव और दौड़भाग भरी जिंदगी को कमजोर याददाश्त की वजह मानते हुए बताते हैं कि योग के जरिए स्मरण शक्ति मजबूत की जा सकती है। वह कहते हैं, ‘योग विज्ञान के मुताबिक इसकी एक वजह मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में कमी या वायु रोग में वृद्धि होना है। लेकिन, इसके लिए किसी दवा के बजाय योग और आसन ज्यादा कारगर साबित होते हैं। वे बताते हैं कि स्कूलों में बच्चों को कान पकड़कर उठक-बैठक करने की सजा का प्रावधान भी मेमोरी को तेज करने के लिए बनाया गया था। इससे याददाश्त में धार पैदा होती है।

सबसे पहले बात करते हैं रक्त प्रवाह की। इसे सही करने के लिए शीर्षासन, सर्वागासन और पूर्वोत्तासन का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा, प्राणायाम के जरिए भी मेमोरी में धार लाई जा सकती है। अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका प्राणायाम ऐसे ही हैं। इनके नियमित अभ्यास से मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह आसान और तेज हो जाता है। इससे मेमोरी भी मजबूत होती है। इसके अलावा, अगर आप रोजाना 15 मिनट ध्यान कर सकें तो इससे भी तनाव पर काबू पाया जा सकता है और मस्तिष्क एकाग्रचित होता है। अनूप यह भी बताते हैं कि ध्यान के जरिए मस्तिष्क में अल्फा किरणों की वृद्धि होती है। इसकी वृद्धि से मन और मस्तिष्क दोनों की ताकत में इजाफा होता है, जिससे स्मरण शक्ति खुद-ब-खुद बढऩे लगती है।

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