30 मिनट और पता चल जाएगा मरीज में संक्रमण का नाम

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लखनऊ। डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में घुटना-कूल्हा प्रत्यारोपण अत्याधुनिक तकनीक से किया जा सकेगा। यहां पर डॉक्टर अब कंप्यूटर व विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से मरीजों की सर्जरी कर सकेंगे। शुक्रवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री आर्थोनेवीगेशन मशीन का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा माइक्रोबायोलॉजी में मॉल्डीटॉफ मशीन का भी उद्घाटन किया जा सकता है। इस मशीन से फंगल व बैक्टीरियल संक्रमण आसानी से पता सकेगा।

आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सचिन अवस्थी का कहना है कि अभी तक मरीज में घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण ‘ जिग बेस्ड सर्जरी की जाती थी। इसमें घुटने या कूल्हे के ऑपरेशन के वक्त मैनुअल काम होता था। जोड़ की सफाई में हड्डी काट कर निकालनी है। उपकरण से खुद डाक्टर मापते थे। ऐसे में कभी-कभार हड्डी अधिक कट जाती थी। जिससे रिप्लेसमेंट के दौरान हड्डी को जोड़ना चुनौती होता था। अब इस आर्थोनेवीगेशन की मशीन से प्रत्यारोपण सटीक होगा। यह सेंसर बेस्ड टेक्नोलॉजी है। एक सेंसर मरीज के ऑपरेशन करने वाली प्वाइंट पर होगा। वहीं दूसरा सेंटर कंप्यूटर से अटैच होगा। सेंटर घुटना या कूल्हे के विजुअल कैप्चर कर लेगा।

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इसके बाद सॉफ्टवेयर स्टेप-टू-स्टेप सर्जरी प्लान कर देगा। वहीं मरीज के जोड़ की हड्डी कितनी कटनी है, यह सब तय होगा। दावा है कि इस विधि से 99.9 प्रतिशत सर्जरी सफल होगी। यह सेंसर इंफ्रा रेज बेस्ड हैं। डॉ. सचिन अवस्थी के मुताबिक राज्य के सरकारी अस्पतालों में यह पहली मशीन लगी है। इसकी कीमत 73 लाख के लगभग है। यहां पर आर्थोनेवीगेशन मशीन से सर्जरी का अतिरिक्त शुल्क नहींं देना होगा, जबकि प्राइवेट में इसके लिए 40-50 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में मॉल्डीटॉफ मशीन का उद्घाटन होगा। डॉ. ज्योत्सना का कहना है कि इस मशीन में बैक्टीरिया, फंगस की 30 मिनट में पहचान की जा सकेगी। इससे यह तय हो सकेगा कि मरीजों पर एंटीबायोटिक कौन सी दी जाए, यह तय किया जा सकेगा।

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