लखनऊ। वर्चस्व की जंग व आपसी खींच -तान के चलते संजय गांधी पीजीआई के निदेशक की तैनाती होने में देर होने के साथ ही नये निदेशक का नाम यक्ष प्रश्न बनता जा रहा है। बताया जाता है कि अंतिम तीन नामों का चयन के बाद ही खींचतान शुरु हो गयी है। यह तीनों चयनित नाम पीजीआई के ही अध्ययनरत है।
पीजीआई में निदेशक के पद पर तैनाती लम्बी खिंचती जा रही है। डा. राकेश कपूर को वीआरएस मिलने के बाद पीजीआई के लोगों को उम्मीद थी कि उनके बीच के ही वरिष्ठता के आधार पर कार्यवाहक निदेशक बनाकर नये निदेशक का चयन किया जाएगा। परन्तु अचानक लोहिया संस्थान के निदेशक को कार्यवाहक निदेशक बनने पर सभी आश्चर्य चकित थे। नये निदेशक के पद के चयन के लिए 35- 37 नाम सामने आने के बाद स्क्रीनिंग होने पर 11 नाम चयन किये गये।
11 डाक्टरों का साक्षात्कार के बाद तीन नामों का चयन कमेटी ने किया। इन तीन नामों में एक नाम का चयन पीजीआई के निदेशक पद पर होना चाहिए। बताया जाता है कि तीन नामों में से किसी एक के नाम का चयन होने में दिक्कत आ रही है। बताते है कि अंतिम चयनित तीनों भी पीआई में अध्ययन कर चुके है आैर एक दूसरे में वर्चस्व की जंग खींच तान कर रहे है। शिकायतें भी शासन तक पहुंच गयी है।
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