लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्रशासन की लापरवाही से ब्लड की जांच में नूमना एकत्र करने वाली वॉयल (शीशी) की क्वालिटी घटिया निकली है। इस कारण सैकड़ों मरीजों के ब्लड के नमूने बेकार हो गये आैर जांच भी समय पर नही हो पायी। नतीजतन तमाम मरीजों के खून के नमूने खराब हो गए। वॉयल गडबड़ निकले की जानकारी मिलने पर अपनी कमी को छुपाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दिये कुछ जिम्मेदार अधिकारिया ने बगैर ही आयी अाधी वॉयल लौटा दी गयी आैर सबकुछ सही होने का दावा किया जा रहा है।
केजीएमयू की पैथालॉजी, ट्रामा सेंटर की पैथालॉजी में सैकड़ों वॉयल की खपत हो जाती है। यहां पर संक्रमण, सीबीसी व इलेक्ट्रोलाइट जैसी अहम बीमारियों की पहचान के लिए खून के नमूने खास तरह की वॉयल में रखे जाते हैं। इस वॉयल में रसायन होता है। जो ब्लड की क्लाटिंग नहीं होने देता है। बताया जाता है कि वॉयल पर ज्यादा कमीशन के चक्कर में वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के बगैर घटिया वॉयल की खरीददारी अफसरों ने कर डाली आैर आनन-फानन में प्रयोग के लिए पैथालॉजी में आपूर्ति कर दी। परन्तु वॉयल में जैसे ही नमूने डाले गए ब्लड जम आैर क्लाटिंग बन गयी।
अवकाश होने के कारण पहले तो मामले को दबाये रखा गया। परन्तु मामले की शिकायत होने पर जांच होने से पहले ही वॉयल को वापस कर दूसरी वॉयल भी मंगा ली गयी। शिकायत में मरीज व तीमारदारों ने खून की रिपोर्ट न मिलने की बात कही। पैथोलॉजी में रिपोर्ट के लिए पहुंचे तो पता चला नमूने खराब हो गए हैं। दोबारा जांच के लिए नमूने देना होगा। तमाम मरीजों ने दोबारा वॉयल बाहर से खरीद कर जांच करायी है। वहीं डिप्टी मेडिकल अफसर डॉ. हरदीप से इस मामले की कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया।
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