यहां राष्ट्रीय व उत्तर भारत के पहले दो विभागों की ओपीडी शुरू

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में शुक्रवार को दो नये विभाग पीडियाट्रिक आर्थोपैडिक एवं स्पोट्र्स मेडिसिन की ओपीडी का शुभारंभ कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बच्चों व खिलाड़ियों का उच्चस्तरीय इलाज किया जा सकेगा। उद्घाटन कार्यक्रम में पीडियाट्रिक आर्थोपैडिक विभाग के प्रमुख डा. अजय सिंह ने बताया कि लगभग 10 वर्ष पहले आर्थोपैडिक विभाग में 25 बिस्तरों की पीडियाट्रिक आर्थोपैडिक यूनिट को शुरू किया गया था। तब से यूनिट उनकी अध्यक्षता में आर्थोपैडिक विकार वाले बच्चों को विशेष उपचार प्रदान कर रही है। इन बीमारियों में प्रमुख रूप से ंिहप,रीढ़ की जन्मजात असमान्यता, पैरों की जन्मजात विकृति के सेरेब्राल पाल्सी सहित अन्य विकार शामिल है। यह यूनिट ट्रामा सेंटर में यूएस आपातकालीन चिकित्सा आैर आघात की अंतराराष्ट्रीय सहयोग के साथ एवं भारतीय सोसायटी आफ पीडियाट्रिक ट्रामैटोलॉजी की देखरेख में स्थापित विशिष्ट प्रोटोकाल का पालन करती है।

यूनिट वर्तमान में प्रत्येक सप्ताह 180 से 200 विभिन्न प्रकार के विकारों से पीड़ित बच्चों का इलाज कर रही है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में 37-40 प्रतिशत बच्चे घायल होते है। इनका भी इलाज इस यूनिट के माध्यम से किया जा रहा है। इस यूनिट के तहत यूपी उत्तराखंड, बिहार एवं नेपाल से भी बच्चे आ रहे है। किंतु मानव संसाधनों एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण सर्जरी की वेंटिग लम्बी हो गयी है। 13 जून को शासनादेश के अनुसार विभिन्न जन्मजात आर्थोपैडिक विकारों आैर चोटों से पीड़ित बच्चों के उच्चस्तरीय इलाज के लिए स्वतंत्र विभाग की स्थापना करने के लिए कहा गया है। इस घोषणा के बाद यहां पीडियाट्रिकआर्थोपैडिक विभाग भारत का पहला विभाग बन गया है। डा. सिंह ने बताया कि आज दो अतिरिक्त ओपीडी शुरू कर दी गयी है। बुधवार से विशेष पीडियाट्रिक पुनर्वास ओपीडी का संचालन भी शुरु होगा।

दो एमसीएस कोर्स का भी संचालन होगा तथा वर्तमान में दो पीडियाट्रिक आर्थोपैडिक फेलोशिप का सफलता पूर्वक संचालन हो रहा है। वही स्पोट्र्स मेडिसिन विभाग के प्रमुख डा. आशीष कुमार ने बताया कि सोमवार व बृहस्पतिवार को ओपीडी का संचालन किया जाएगा। इस ओपीडी में खिलाड़ियों को विशेषकर उनको लगने वाली चोटों जैसे लिंगामेंट इंजरी, आर्थोस्कोपी,जोड़ों के प्रत्यारोपण के अलावा शारीरिक क्षमताओं का आंकलन एवं उत्कृष्ट मशीनों से स्टेट आफ आर्ट फिजियोथेरेपी व कसरत की सुविधा प्राप्त होगी। इस विभाग की शुरुआत शताब्दी फेज दो अस्पताल में स्थापना की जा चुकी है। पूरे देश में मात्र चार स्थानों पर ही स्पोट्र्स मेडिसिन विभाग का पाठ्यक्रम चल रहा है। यह प्रदेश का ही नहीं उत्तर भारत का पहला विभाग है।

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