लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद के ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी बाल रोग विभाग के जूनियर डॉक्टर गंभीर बच्चों को निजी नर्सिंग होम व निजी मेडिकल कालेज में रेफर कर दे रहे है। ऐसा नही है कि बाल रोग विभाग के वरिष्ठ डाक्टरों को इसकी जानकारी नहीं होती है। भर्ती न हो पाने के लिए आईसीयू व बिस्तर फुल होने के कारण बताया जाता है। रविवार को कुछ ऐसा ही वाक्या हुआ। यहां पर जूनियर डॉक्टरों ने भर्ती हुए दो माह के बच्चे को निजी मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। रेफर के बाद परिजनों को तत्काल निजी एंबुलेंस तक मंगा कर दे दी गयी।
मड़ियांव के रहने वाले प्रभात मिश्रा का बेटा वीर (2 महीने) ठंड लगने से हाथ पैर अकड़ गये थे आैर थरथरा रहा था। परिजन लक्षण देख कर आनन फानन में उसे लेकर ट्रॉमा लाए आैर इमरजेंसी में डॉक्टरों ने भर्ती करने बाद चौथे तल पर बाल रोग विभाग भेज दिया। जहां पर जूनियर डॉक्टरों ने बच्चे की हालत गंभीर बतायी आैर उसे दुबग्गा स्थित निजी मेडिकल कालेज ले जाने का परामर्श दिया। यहां तक तत्काल निजी एंबुलेंस भी जूनियर डॉक्टरों ने तय करा दी आैर निजी मेडिकल कालेज भेज दिया,पर निजी मेडिकल कालेज में नियोनेटल केयर यूनिट में वेंटीलेटर की मशीन खराब थी।
इसके बाद परिजनों ने दुबग्गा से लाकर उसे विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिजनों का आरोप है बाल रोग विभाग के डॉक्टरों के कारण उनके बच्चे की जान खतरे में पड़ गयी है। अगर प्राथमिक उपचार देकर रेफर किया गया तो उसकी धड़कने थम रही है। डॉक्टरों ने इलाज में देरी व लापरवाही से बच्चे की हालत बिगड़ने की बात कही है। हालांकि केजीएमयू प्रशासन ने इसकी जांच कराने के निर्देश दे दिये है।