लखनऊ। कैंसर,चेचक तथा दुर्घटना में अपनी आंखे खो चुके बच्चों व बड़ों के लिए राहत भरी खबर है। केजीएमयू में नई तकनीक का इस्तेमाल कर चिकित्सक नकली आंख लगा रहे हैं,जो देखने में बिलकुल असली आंखों की तरह मालूम पड़ती हैं। इन आंखों से कोई भले न देख पाये ,लेकिन दुनिया के देखने लायक होती हैं। कैंसर से अपनी आंखे खो चुके लोगों का यह आंखे केजीएमयू में नि:शुल्क लगायी जा रही हैं। उक्त जानकारी केजीएमयू के प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष एवं इंडियन प्रोस्थोडोंटिक्स सोसायटी के उत्तर प्रदेश शाखा के सचिव प्रो.पूरन चंद्र ने दी। वह शुक्रवार को इंडियन प्रोस्थोडोंटिक्स सोसायटी की उत्तर प्रदेश शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे।
केजीएमयू के कलाम सेंटर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन दंत चिकित्सकों को नई तकनीक से रूबरू कराते हुए उन्होंने बताया कि मौजूद समय में कैंसर व दुर्घटन के चलते अपनी आंखे खो चुके बच्चों के लिए नई तकनीक से नकली आंख बनाने व लगाने का काम केजीएमयू में पिछले काफी समय से केजीएमयू में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में ५ से १० प्रतिशत मरीज नकली आंख लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। जिसमें ज्यादातर मरीज बच्चे होते हैं,जो कैंसर व चेचक के चलते अपनी आंख खो चुकेे होते हैं। उन्होंने बताया कि डिजीटल तकनीक से बनायी गयी आंखों में कोई देखकर यह नहीं बता सकता कि यह असली है या नकली है। आंख न होने के कारण लोगों में हीन भावना आती है, साथ ही चेहरे पर विकृति के चलते लोग समाज से कटने लगते है,उनका आत्म विश्वास कम होता है। लेकिन नकली आंख लगाने के बाद इन समस्याओं से लोगों को निजात मिलती है।
वहीं बीएचयू के प्रोस्थोडेंटिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.अतुल भटनागर ने बताया कि उत्तर प्रदेश में तम्बाकू व पान मसाले के सेवन से मुंह के कैंसर से पीडि़त रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में २५ से ३० प्रतिशत मरीज ऐसे आ रहे हैं,जो मुंह के कैंसर से पीडि़त हैं तथा उनके जबड़ें में विकृत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मुंह के कैंसर से निजात पाने का एक मात्र रास्ता सर्जरी है।
मुंह के कैंसर से जूझ रहे मरीज का सर्जरी के बाद तालू हंटा दिया जाता है। जिसके बाद उसे खाने से लेकर लोगों से मिलने जुलने में समस्या आती है। ऐसें में प्रोस्थोडेंटिक्स विभाग द्वारा नई तकनीक की खोज की गयी है। जिसमें टाइटेनियम या कॉपर का आबचूरेटर बना कर तालू की जगह पर लगा दिया जाता है। आबचूरेटर एक प्रकार का ढांचा होता है। जिसमें दांत भी लगाये जा सकता है। यह मुंह के कैंसर में सर्जरी करा चुके रोगियों में काफी कारगर साबित हो रहा है। साथ ही केजीएमयू व बीएचयू में यह ढांचा मात्र ३ से ४ हजार रुपयें में लग जाता है।
इस अवसर पर डा.लक्ष्य,डा.कौशल,डा.आरडी.सिंह,डा.सुनील कुमार जुड़ैल,डा.दीक्षा आर्या,सरदर पटेल डेंटल कालेज के डा.अजय मौजूद रहे।