लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर प्रशासन की लापरवाही से कर्मचारियों का ओवर टाइम कार्य को कागजों पर दिखाया जा रहा है। इसको दिखाकर ही फर्जी बिल भुगतान कराने की कोशिश की गयी। मामले की गोपनीय शिकायत पर अधिकारियों ने भुगतान पर रोक लगा दी है आैर जांच के निर्देश दे दिया है। अधिकारियों का दावा है कि जांच में दोषी पाये जाने पर कार्रवाई तय है। बताया जाता है कि कई विभागों ने अपने खास कर्मचारियों का ओवर टाइन दिखा कर लाखों रुपये का घोटाला कर दिया है।
ट्रॉमा सेंटर में संविदा पर कार्यरत दो कर्मचारियों का ओवरटाइम दिखाकर एक महीने में 40 दिन काम करने का भुगतान करने का अनुमोदन ट्रॉमा प्रभारी पास भेजा था। यहां पर ट्रॉमा प्रभारी की मुहर भी लग गयी। इसके बाद यह भुगतान केजीएमयू चिकित्सा अधीक्षक पास पहुंचा तो प्राथमिक तौर पर देखने पर चिकित्सा अधीक्षक डा. विजय कुमार को गड़बड़ी दिखी। प्राथमिक जांच में संदेह होने पर उन्होंने तत्काल भुगतान करने से मना कर दिया। इसके बाद अधिकारियों को तलब करके मामले की जांच के आदेश दिए हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि बायोमेट्रिक अटेडेंस चेक कराने बाद ही भुगतान होगा।
उन्होंने बताया कि बिना बायोमेट्रिक अटेंडेंस में ओवर टाइम काम को देखे भुगतान नहीं किया जा जाएगा। अगर सूत्रों की मानें तो केजीएमयू में डॉक्टरों के खास कर्मचारियों का काफी समय से ओवर टाइम काम दिखाकर भुगतान किया जा रहा है। शिकायत बाद केजीएमयू प्रशासन से कुछ कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि खास कर्मचारियों का ही ओवर टाइम दिखाया जाता है, जब कि वह भी ओवरटाइम करते है तो उन्हें ओवरटाइम नहीं दिया जाता है। केजीएमयू प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। इसके बाद मेडिसिन विभाग, आर्थोपैडिक, सर्जरी समेत अन्य विभागों से इसका ब्यौरा जुटाया जा रहा है। इसके अलावा पहले हुए भुगतान की भी जांच कराई जा रही है।