लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में अब १० वर्ष से कम आयू के बच्चों के दिल में छेद का आपरेशन द्वारा इलाज शुरू हो गया है। अभी तक यहां पर युवाओं व अधेड़ व्यक्तियों के दिल में छेद हो जाने पर इलाज तो होता था लेकिन बच्चों के केस आने पर एम्स भेजा जाता था।
मंगलवार को केजीएमयू सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों ने डॉ. शेखर टण्डन के नेतृत्व में एक वर्षीय बच्चे के दिल में मौजूद तीन छेद का सफल आपरेशन किया। टीम में डॉ. शेखर टण्डन के साथ डॉ. अम्बरीश व डॉ. दिनेश कौशल का सहयोग रहा। डॉ. शेखर टण्डन ने बताया कि बच्चे का वजन मात्र ६ किलो था। केजीएमयू में इस प्र्रकार यह पहला केस था। बच्चा अब स्वस्थ है। उन्होंने बताया कि विश्व
में इस प्रकार के बहुत ही कम मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक हम लोग १० वर्ष से कम आयू वाले बच्चों का आपरेशन नहीं करते थे लेकिन अब हमारे विभाग में इस प्रकार के आपरेशन भी होंगे। चिकित्सकों के मुताबिक बच्चे के हृदय में तीन छिद्र थे। इस वजह से बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा था।
चिकित्सकों का कहना है कि यह जानकारी गर्भावास्था के दौरान ही अल्ट्रासाउंड के जरिए पता लगा ली जाती है। हृदय के दोनों हिस्सों के बीच कोई छेद हो तो सामान्य रुप से रक्त का प्रवाह अधिक दबाव वाली जगह से कम दबाव वाली जगह की और होना चाहिए यानी रक्त का संचार बायें चेंबर से दाये चेंबर की तरफ होना चाहिए जिसे लेफ्ट टू राइट संट कहते है।
दिल में छेद होने पर समान्यता बच्चे का रंग नीला पड़ जाता है जिसमें शरीर और चेहरे के अलावा जीभ, नाखून और होंठ भी नीले हो जाते है. इस बीमारी में बच्चे कई बार बेहोश भी हो जाते है और उनका वजन कम होने लगता है।
इसी तरह नवजात शिशु को दिल में छेद होने पर उसे दूध पीने में परेशानी, दूध पीते हुए पसीना या वजन कम होना और जल्दी थक जाना, बार-बार निमोनिया होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ टेस्ट करने के बाद ही यह बताते हैं कि शिशु एंजोप्लास्टी से ठीक होगा या सर्जरी करनी पड़ेगी। हृदय रोग विशेषज्ञ नवजात बच्चे का मूत्र और रक्त का परीक्षण करवाने के साथ-साथ इकोकार्डियोग्राम, ईसीजी और चेस्ट के एक्सरे भी करते हैं। चिकित्सक एंजियोग्राफी से दिल के छेद का आकार, साइज और गहराई देखते हैं।