170 से अधिक लोगों ने लिया सड़क सुरक्षा का संकल्प
लखनऊ। विश्व आघात दिवस (वर्ल्ड ट्रॉमा डे) के अवसर पर शनिवार को एसजीपीजीआई (SGPGI) स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर (ATC) में सड़क सुरक्षा और प्राथमिक चिकित्सा पर एक विशाल जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सेंटर के फैकल्टी और स्टाफ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 170 से अधिक आम नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:00 बजे स्वागत भाषण से हुई, जहाँ डॉ. रुपाली ने बताया कि युवाओं में मृत्यु और विकलांगता का एक प्रमुख कारण ‘ट्रॉमा’ (गंभीर चोट) है। उन्होंने कहा कि अधिकतर सड़क दुर्घटनाओं को सही सावधानी से रोका जा सकता है।
’गोल्डन आवर’ और प्राथमिक चिकित्सा का महत्व
एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन ने ट्रॉमा प्रबंधन में ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “अस्पताल पहुँचाने से पहले मिलने वाली सही देखभाल और शुरुआती उपचार से कई अनमोल जानें बचाई जा सकती हैं।”
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने निम्नलिखित मुख्य विषयों पर व्यावहारिक प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) और मार्गदर्शन प्रदान किया:
रोड साइड फर्स्ट रिस्पोंडर: डॉ. अमित ने बताया कि दुर्घटना स्थल पर आपातकालीन नंबर 108 पर कॉल करना, सीधे दबाव बनाकर खून बहना रोकना और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुँचाए बिना पीड़ित को स्थानांतरित करना कितना महत्वपूर्ण है।
चेहरे और ईएनटी की चोटों का प्रबंधन: कान, नाक, गले और चेहरे पर लगने वाली चोटों या जबड़े के फ्रैक्चर की स्थिति में घबराने के बजाय प्राथमिक उपचार करने और सही समय पर अस्पताल पहुँचने की सलाह दी गई।
अदृश्य घाव (PTSD): विशेषज्ञों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाएँ केवल शारीरिक नहीं, बल्कि गहरा मानसिक आघात भी देती हैं। बुरे सपने, घबराहट और दुर्घटना का डर जैसे लक्षणों से उबरने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श और परिवार के सहयोग को जरूरी बताया गया।
अंगदान – ‘किसी के लिए चमत्कार बनें’: डॉ. सुरुचि ने ‘ब्रेन डेथ’ के बारे में बताते हुए स्पष्ट किया कि एक व्यक्ति का अंगदान आठ लोगों को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए लोगों को इसका संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
खुली बातचीत और सड़क सुरक्षा का महा-संकल्प
वैज्ञानिक सत्रों के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर काल में प्रतिभागियों ने हेलमेट, सीट बेल्ट, स्पीड लिमिट, और ड्रिंक एंड ड्राइव जैसे विषयों पर सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी 170 प्रतिभागियों ने एक साथ खड़े होकर यातायात नियमों के पालन, दुर्घटना पीड़ितों की तुरंत मदद करने, मोबाइल का उपयोग न करने तथा समाज में सड़क सुरक्षा व अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने की सामूहिक शपथ ली।











