विश्व डायबिटीज दिवस : हर पांचवां मरीज मधुमेह की चपेट में,
लाइफ स्टाइल से डायबिटीज का सटीक इलाज
न्यूज । डायबिटीज सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से युवाओं में भी बढ़ रही है।
डॉक्टरों ने बताया कि ओपीडी में आने वाले हर पाँचवें मरीज को डायबिटीज की समस्या है। इसमें सबसे बड़ी वजह गलत खानपान, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि है। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद डायबिटीज के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने कहा कोविड के बाद कई युवाओं में ब्लड शुगर बढ़ा हुआ पाया जा रहा है। कोविड के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पैंक्रियास पर असर पड़ा है। साथ ही तनाव, असंतुलित खानपान और नींद की कमी भी इसकी बड़ी वजह है।
अगर लोग समय-समय पर शुगर टेस्ट और हेल्थ चेकअप करवाएं तो बीमारी को शुरुआती दौर में ही कंट्रोल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोटापा और बढ़ता स्क्रीन टाइम अब बड़ी चुनौती बन गए है, लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर रहने से शरीर की गतिविधियां कम हो जाती है खानपान बिगड़ता है और वजन बढ़ता है। यही मोटापा आगे चलकर डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है।
डॉक्टरों ने बताया कि आजकल बच्चों में मोटापा बहुत तेजी से बढ़ रहा है और यह कम उम्र में डायबिटीज होने की बड़ी वजह बन गया है। बच्चे गलत खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और ा्यादा मोबाइल या टीवी देखने के कारण तेजी से मोटे हो रहे हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज के मामले 10 से 14 प्रतिशत तक देखे जा रहे हैं। अगर ब्लड शुगर कंट्रोल में न हो तो बच्चे पर असर पड़ सकता है या समय से पहले डिलीवरी का खतरा रहता है। वहीं बच्चों में लगभग एक प्रतिशत डायबिटिक और 15 प्रतिशत प्रीडायबिटिक पाए जा रहे हैं।
वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते डायबिटीज की पहचान हो जाए और जीवनशैली में सुधार किया जाए तो दवाइयों की जरूरत कम पड़ती है। संतुलित आहार नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद ही इसका सबसे अच्छा इलाज है। आजकल मोटापा और डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बहुत बढ़ रही हैं।












