वो पुरानी दास्तां… लो फिर याद आ गयी

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लखनऊ। लखनऊ की सरजमीं पर किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बात ही कुछ आैर है। हमे फर्क है, यहां बहुत सीखने को मिला। उस पर इस होटल में आज सब का साथ आना आैर मस्ती करना… जूनियर आैर सीनियर मिलने का मौका। बात ही कुछ आैर है। जूनियर ने सीनियर को देखा.. तो पहले आप… पहले आप की तहजीब से सरोबोर हो गये। यह बाल रोग विभाग के स्थापना दिवस में शामिल होने आने बाल रोग विशेषज्ञों ने कही। बाल रोग विशेषज्ञों ने 58 वर्ष के जार्जियन को एल्यूमनाई मीट में शामिल होने के बुलाया था। ऐसे में 58 वर्षो के बैच के काफी डाक्टर आज होटल क्लार्क में एकत्र हुए आैर पुरानी यादों को साझा किया आैर जमकर मस्ती धमाल किया।

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कार्यक्रम के संयोजक डा. अजय श्रीवास्तव बताते है कि 1961 में बाल रोग विभाग का पहला बैच था। इसलिए सभी बैच के जार्जियन को निमंत्रण भेजा गया। पुराने बैच के तो कम लेकिन लगभग बीस वर्षो के ज्यादातर जार्जियन एकत्र हो गये। केजीएमयू के बाल रोग विभाग की डा. शैली अवस्थी संरक्षक है। डा. श्रीवास्तव बताते है कि एक बार इमरजेंसी में उनका सहयोगी नहीं आया तो उन्होंने उस दिन ड¬ूटी कर ली, लेकिन अलगे दिन फिर मेरी ड¬ूटी थी। ऐसे में 72 घंटे ड¬ूटी करते हुए बेहोशी आने लगी तो सीनियरों ने रिलेक्स किया, लेकिन मैने उनके सहयोग से खाना कर फिर काम किया। उस वक्त विभागाध्यक्ष डा. पीके मिश्रा, डा. इंदुबाखलू की सख्ती से सब कांपते थे।

फिरोजाबाद से आये 1984 बैच के डा. अमित गर्ग बताते है कि शनिवार को हम लोग नाइट में पिक्चर जाते थे, आने में टेम्पो नहीं मिलता था आैर रिक्शा वाला हास्टल आने में डरता था। रास्तें में ही छोड़ कर भाग जाते थे। मेरठ से आयी 1995 बैच की पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डा. मुनेश तोमर कहना है कि कालेज लाइफ का एक किस्सा आज तक नहीं भूलता है। उस वक्त शनिवार को सहेलियों के संग खामोशी मूवी देखकर टेम्पो से लौट रही थी कि उसमें सवार कुछ युवकों ने बंदूक दिखाकर महंगा सामान ले लिया आैर टेम्पो से उतार दिया।

मारे डर कर खामोशी से ही हम लोग हास्टल आ गये। 1977 बैच के डा. दिनेश तिवारी कहते है कि सहारनपुर से लम्बे समय बाद आया तो यादें ताजा हो आयी। वह भी इस होटल में आना स्टूडेंट लाइफ में ड्रीम ही होता था। आज कर अच्छा लगा। उस गंज में मूवी के बाद एक रुपये में पांच पूड़ी आैर बेहतरीन सब्जी का मजा ही कुछ आैर था। चौक गेट का मक्खन का मजा ही अलग था। जार्जियन डा. आशुतोष बताते है कि शाम को सभी सीनियर तथा जूनियर मिल कर बेहद खुश थे आैर पुरानी यादों को साझा कर मस्ती धमाल किया।

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