लखनऊ। विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान को एनएबीएच की पूर्ण मान्यता मिली है। भारतीय गुणवत्ता परिषद, राष्ट्रीय अस्पताल मान्यता बोर्ड से मिली एनएबीएच की मान्यता तीन वर्षों के लिए होगी। एनएबीएच मानक की मान्यता चतुर्थ संस्करण पर आधारित है। जिसे भारतीय गुणवत्ता परिषद नई दिल्ली के स्वास्थ्य देखभाल संगठनों के लिए स्थापित है।
यह जानकारी संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानंद ने दी है। उन्होंने बताया कि बीते आठ जनवरी को एनएबीएच की मान्यता हासिल करने वाला राजधानी का दूसरा संस्थान बन गया है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सभी चिकित्सा संस्थानों को एनएबीएच की मान्यता लेना अनिवार्य हो जाएगा। उन्होंने बताया कि एनएबीएच की मान्यता मिलने के बाद अब चुनौतियां बढ गई हैं। अब विवेकानन्द पॉलीक्लीनिक व आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सक मरीज को दवा लिखेंगे। वह केवल मेडिकल स्टोर के फार्मासिस्ट व चिकित्सक के पढने की भाषा नहीं होगी। बल्कि चिकित्सकों को ब्लाक व कैपिटल लेटर में स्पष्टरूप से दवा लिखना होगा। ताकि मरीज व तीमारदार चिकित्सक ने क्या दवा लिखी है उसको आसानी से पढ सकें।
इसके साथ ही मरीज को क्या बीमारी है? क्या दवा दी जा रही है। इस सबके बारे में उल्लेख करना अनिवार्य होगा . इससे पहले विवेकानंद पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान जून 2010 एनएबीएच की मान्यता के लिए पूर्ण आवेदन किया था। इसके बाद वर्ष 2014 में भी आवेदन किया था, लेकिन मानक नया संस्करण लागू होने के कारण सफलता नहीं मिली। इसके ढाई वर्ष बाद एनएबीएच की मान्यता प्राप्त कर लिया है।
उन्होंने बताया कि विवेकानंद पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान चिकित्सा देखभाल के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक प्रतीक बन गया है। उत्कृष्ट पैरामीटर लागू करने में विवेकानंद पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान दूसरे अस्पतालों के लिए प्रोत्साहन का कार्य करेगा।
एनएबीएच मानक का मौजूदा संस्करण के तहत 10 अध्याय हैं। जो किसी भी स्वास्थ्य संगठन को पूरा करने के लिए एक बडा चुनौतीपूर्ण कार्य है। 350 शैय्या वाला अस्पताल 12 विधाओं परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। धर्मार्थ संस्थान होने के बावजूद विवेकानंद पॉलीक्लीनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान स्वामी विवेकानंद की दृष्टि का अनुसरण करते हुए। रोगियों की सेवा जीवित ईश्वर के रूप में रियायती दरों पर सेवा कर रहा है।