लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय तथा इंडियन एकेडमी ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज के तत्वावधान में दो दिवसीय सेंट्रल जोन नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। दो दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में डाक्टरों और बेसिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सम्मेलन के कैंसर सहित अन्य बीमारियों के नये अपडेट की विशेषज्ञ डाक्टरों ने दी। सम्मेलन में 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्घाटन किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सेल्बी हॉल में न्यायमूर्ति शबीहुल हसनैन द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मुख्यअतिथि न्यायमूर्ति शबीहुल हसन ने स्मारिका का विमोचन किया। इसके अलावा फैलोशिप किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय कुलपति प्रो एम एल बी भट्ट को प्रदान की गई। युवा वैज्ञानिक के लिए ओम प्रकाश शर्मा पुरस्कार दिया गया। इन्होंने बायोमेडिकल रिसर्च में उत्कृष्ट योगदान दिया है। प्रमुख वक्ताओं में जोधपुर से डॉ. कमला कांत ने कहा कि कीटनाशकों और अन्य रसायनों के अंधाधुंध उपयोग के कारण पुरुष नपुंसकता के बढ़ते प्रसार पर बोलते हुए कहा कि इससे न केवल शुक्राणुओं की संख्या, बल्कि इसकी गुणवत्ता में भी कमी आती है। डॉ. रीमा दादा ने स्वस्थ जीवन में योग और ध्यान के वैज्ञानिक महत्व को समझाया और टेलोमेरिक लंबाई के नुकसान को रोककर शुक्राणु की गुणवत्ता और संख्या में सुधार करने में विस्तार से जानकारी दी।
आईआईटी कानपुर से डॉ. बुशरा अतीक ने प्रोस्टेट कैंसर पर अपने शोध को प्रस्तुत किया और रोग के लिए माइक्रो आर एन ए आधारित नए निदान और रोगनिरोधी बायोमार्कर की भूमिका को समझाया, उन्होने यह भी कहा कि वह प्रोस्टेट कैंसर के लिए नए बायोमार्कर उपकरण के लिए एम्स, नई दिल्ली और केजीएमयू, लखनऊ के साथ मिलकर काम कर रही है।
आईआईटी मंडी के डॉ. अमित प्रसाद ने अपनी बात में बताया कि कैसे परजीवी टीनिया सोलियम, मानव प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कमजोर करता है, जिससे विकासशील दुनिया में मिर्गी होती है।
आईआईटी जोधपुर के डॉ. अमित मिश्रा ने न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों को रोकने में एंजाइम ई 3 यूबिकिटिन लिगेज की लाभकारी भूमिका पर बात की।
एम्स, नई दिल्ली के प्रो. एस.एस. चौहान ने कहा कि रक्त कैंसर के रोगियों में एंजाइम कैथेप्सिन का स्तर अधिक होता है और इसके निषेध का उपयोग कीमोथेरेप्यूटिक एजेंट के रूप में किया जा सकता है। एम्स, नई दिल्ली से प्रो. कुंजग चोसडोल ने जीन एफएटी 1 पर अपना व्याख्यान दिया, जिसे ग्लियोब्लास्टोमा के लिए रोगनिरोधी या चिकित्सीय मार्कर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
केजीएमयू के प्रो एन. एस वर्मा ने डायबिटीज और डिसिप्लिडिमिया के प्रबंधन में ओमेगा 3 फैटी एसिड के लाभकारी प्रभाव पर बात की। एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अब्बास अली महदी ने संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नयी जानकारी के लिए इस प्रकार का सम्मेलन आयोजित करना बहुत महत्वपूर्ण है।
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