लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के क्वीन मेरी हास्पिटल में प्रसव बाद महिला के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि पर डाक्टरों व पैरामेडिल स्टाफ में हड़कम्प मच गया है। आनन -फानन में महिला से शिशु को अलग करते हुए आइशोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। महिला की सर्जरी व इलाज में लगे डाक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की टीम को एक्टिव क्वारिंटीन किया जाएगा। आश्चर्य की बात यह है कि महिला की कोविड -19 की स्क्रीनिंग में भी कोई लक्षण नही मिले थे।
काकोरी निवासी 24 वर्षीय गर्भवती को जब भर्ती कराया गया था, उस वक्त चालीस हफ्ते का गर्भ था। महिला को क्लोटेसिस बीमारी के अलावा एक अन्य बीमारी के कारण इमरजेंसी सीजेरियन करना पड़ा। इलाज में लगे डाक्टरों का कहना है कि जब वह भर्ती करायी गयी थी, तो पहले उसकी कोविड-19 की स्क्रीनिंग करायी गयी। उसमें कोई लक्षण नहीं मिले थे आैर जहां पर वह रहती है वहां पर भी कोई कोरोना का संक्रमण नहीं पाया गया है। इस लिए पूरी सावधानी बरतते हुए कोरोना संक्रमण से जुड़े मानकों को ध्यान में रखते हुए इमरजेंसी सर्जरी की गयी आैर जच्चा व बच्चा की जान बचायी गयी। सावधानी बरतते हुए महिला का कोरोना जांच के लिए नमूना पहले ही भेजा जा चुका था।
जांच में कोरोना संक्रमण मिलने पर इलाज में जुटी व सर्जरी में शामिल डाक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की टीम एक्टिव क्वारेंटाइन करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही सभी की कोरोना जांच कराने का निर्देश दे दिया गया है। इसके साथ ही जिस वार्ड में महिला भर्ती थी। वहां पर सेनिटाइजेशन करने के साथ ही भर्ती मरीजोंं की जानकारी एकत्र की जा रही है। इसके अलावा आपरेशन थियेटर को बंद करके सेनिटाइजेशन कराया जा रहा है। महिला के शिशु की जांच के बाद रिश्तेदारों को सौंप दिया गया है आैर शिशु को केजीएमयू के मिल्क बैंक से दूध उपलब्ध कराया जा रहा है।
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