लखनऊ। गोमती नगर के डा. राम मनोहर लोहिया संस्थान में लोहिया अस्पताल के विलय होने के बाद दूर दराज से आने वाले इमरजेंसी मरीजों को तत्काल उच्चस्तरीय इलाज मुहैया कराया जा सकेगा। अभी लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में कोई भी गंभीर मरीज आने पर तत्काल उसे केजीएमयू के ट्रामा सेंटर ले जाने की सलाह दी जाती थी। क्योंकि संस्थान में कॉर्डियोलॉजी व न्यूरोलॉजी की इमरजेंसी चल रही है। इसमें भी बिस्तर की उपलब्धता बड़ी मुश्किल से ही हो पाती थी। विलय होने के बाद मरीजों को यहां इमरजेंसी की सुविधा मिलने के अलावा सभी प्रकार के उच्चस्तरीय इलाज मिलेगे।
बताते चले कि लोहिया संस्थान में 350 बेड हैं।
126 डॉक्टर तैनात हैं। 105 जूनियर व सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर हैं। संस्थान की ओपीडी में 2200 से ज्यादा मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। सामान्य बीमारियों के मरीजों को बिना इलाज लौटाया जा रहा है। इसकी वजह से दूर-दराज से आने वाले गंभीर मरीजों को भी रेफर कर दिया जाता है। लोहिया अस्पताल में ट्रामा सेंटर भी बना है, जहां पर मरीज कम ही भर्ती किये जाते है।
यहां पहले से गंभीर मरीजों के इलाज का काफी दबाव है। यहां इलाज न मिलने से ट्रॉमा में और दबाव बढ़ रहा है। लोहिया अस्पताल व संस्थान के विलय के बाद इमरजेंसी सेवाओं में सुधार हो जाना तय है। लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. दीपक मालवीय का दावा है कि विलय के बाद ट्रॉमा शुरू होने से गंभीर मरीजों को काफी राहत मिलेगी। घायलों को भी बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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