लखनऊ। अगर आपका दांत टूट जाता है, तो उसे कचरे में मत फेंके। उसी दांत को दोबारा नया करके किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दंत संकाय में आपके टूटे दांत के स्थान पर लगाया जा सकता है। यह जानकारी वरिष्ठ डा. लक्ष्य ने केजीएमयू के दंत संकाय विभाग की इम्प्लांट यूनिट, ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग, प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग तथा पेरियोडोंटोलॉजी विभाग द्वारा संयुक्त तत्वावधान में आज हीलिंग, इम्प्लांट प्रोस्थोसिस विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला में दी। कार्यशाला में नीदरलैंड से आये डा. इरफान अब्बास ने डेंटल इम्प्लांट की नयी तकनीक की जानकारी दी। दंत संकाय विभाग डीन डॉ. शादाब मोहम्मद भी मौजूद थे।
डा. लक्ष्य ने बताया कि दांत के टूट जाने पर अक्सर दांत को फेंक दिया जाता है, लेकिन अब दांत को विशेष तकनीक से साफ करने के बाद डेंटिनल ग्राइडर में डाल कर चूरा दोबारा बना दिया जाएगा। इसके बाद उसमें कुछ अन्य केमिकल मिलाकर दोबारा दांत का अाकार दे दिया जाएगा। उसी दांत को टूटे दांत के स्थान पर लगा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्राइंडर आ गया है आैर यह प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। डा. लक्ष्य ने बताया कि प्रक्रिया दांत की वास्तविकता बन रहेगी आैर नकली दांत लगाने से राहत मिलेगी। डॉ. संदीप सिंह ने (पीआरएफ) प्लेटलेट रिच फाइब्रीन तथा डेंटिनल ग्राफ्ट के उपयोग की विधि के बारे में जानकारी दी। केजीएमयू सर्जरी विभाग के डॉ. अरूणेश कुमार तिवारी ने एनेस्थीसिया और सर्जिकल तकनीकि के साथ ही डेंटल इमरजेंसी के बारे में कार्यशाला में जानकारी दी।
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