लखनऊ। लगातार पेट दर्द व उल्टी से परेशान तीन वर्षीय बच्ची कुछ भी खाने-पीने असमर्थ थी। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने सर्जरी कर उसे दर्द से निजात दिला दिया। सर्जरी में उसके पेट से बालों को गुच्छा निकला, जिसके फंसे होने के कारण वह कुछ खा पी नहीं पा रही थी। उसका साइकियाट्रिक डिपार्टमेंट के डाक्टर भी कर रहे है।
बस्ती निवासी अरविन्द यादव अपनी तीन वर्षीय की बच्ची को लेकर काफी परेशान थे, पिछले तीन महीने से उसके पेट में दर्द था। इसके बाद इन्होंने बस्ती के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करवाया, लेकिन आराम नहीं हुआ। अंततः उसके माता-पिता बच्चे को लेकर केजीएमयू ओपीडी में पहुंचे। जहां बच्ची को पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. जे.डी. रावत ने जांच करने के बाद भर्ती किया। उन्होंने बताया कि बच्चे के पेट का दर्द बढ़ता ही जा रहा था, साथ ही साथ बच्ची को उल्टियां होने लगी थी, जिसके कारण बच्ची कु छ भी खाने अथवा पीने में असमर्थ थी। बच्ची के माँ बाप से बात करके पता चला की बच्ची को सिर के अलावा कही भी मिले बाल को खाने की भी आदत बन गयी थी।
इस बात का पता चलने के बाद बच्ची को साइकियाट्रिक डिपार्टमेंट में भी दिखाया गया। इसके अलावा अन्य सम्बन्धित जांचे करायी गयी, जिसमें पेट की दूरबीन से भी जांच सम्मिलित थी। इन सबसे पता चला की बच्ची के पेट में बालांे का गुच्छा बन गया है, जो कि पेट दर्द का कारण बनता जा रहा है। बच्ची का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। जनरल एनेस्थीसिया देने के बाद प्रो. जे. डी . रावत ने सर्जरी करते हुए पेट में चीरा देकर पूरा बालो का गुच्छा निकला गया।
सर्जरी के चार दिन बाद बच्ची का खाना पीना शुरू किया गया , बच्ची की हालत में लगातार सुधर होने लगा। ऑपरेशन करने वाली टीम में प्रो. जे डी रावत, डॉ सुधीर सिंह और डॉ निरपेक्ष त्यागी, और एनेस्थीसिया टीम में प्रोफेसर जी पी सिंह, डॉ प्रेमराज सिंह और ओ टी टीम में सिस्टर वंदना और सिस्टर अंजू ने सहयोग दिया।












