लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दंत संकाय विभाग में अंतरराष्ट्रीय ओरल एंड मैक्जिलोफेशियल सर्जरी दिवस मनाया गया। इस दौरान आयोजित कार्यशाला में मैक्जिलोफेशियल सर्जरी विशेषज्ञ डा. यूएस पाल ने बताया कि केजीएमयू के दंत संकाय में पहली बार नयी तकनीक आधारित सर्जरी शुरू की गयी है, इसे प्लेटिज्मा मायोक्यूटेनियस फ्लैप सर्जरी कहते है। इस तकनीक से की गयी सर्जरी में अब पान-मसाला खाने से बंद हुए मुंह को खोलना आसान हो गया है।
डा. पाल ने बताया कि इस तकनीक से की गयी सर्जरी में गले की त्वचा को खास तकनीक से रक्तवाहिकाओं के साथ निकाल कर के मुंह में लगा दिया जाता है। इस तकनीक सर्जरी के बाद बंद मुंह धीरे- धीरे खुलने लगता है। इससे मरीज को खाने पीने में आसानी होती है। डा. पाल ने बताया कि ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस की वजह से पान मसाला या गुटखा का सेवन करने वालों का का मुंह बंद हो जाता है। इससे उन्हें भोजन तो दूर पानी निगलने में दिक्कत होती है। इस दौरान मरीज दांतो एवं आंतरिक भाग को साफ करने तक के लिए दिक्कत होने लगती है। मुंह न खुलने से बोलना भी मुश्किल हो जाता है। इस सर्जरी के दौरान लगभग दो अंगुल तक गले की खाल निकाल कर मुंह में लगायी जाती है और फिर टांका लगा दिया जाता है। इसे प्लेटिज्मा मायोक्यूटेनियस फ्लैप सर्जरी कहते है। उन्होंने बताया कि नयी तकनीक से इसके जरिए अब तक 30 मरीजों की सर्जरी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार इस सर्जरी के प्रति जागरूकता व गुटखा सेवन वाले मरीजों की दिक्कत को देखते हुए बजट भी दे रही है। इस अवसर पर विभाग प्रमुख डा. शादाब ने बताया कि मैक्जिलोफेशियल सर्जरी में नयी – नयी तकनीक आ रही है। यह सर्जरी ज्यादातर ओरल कैंसर के मरीजों में तथा जबड़े की सर्जरी में ज्यादा कारगर होती है। दंत संकाय के डीन डॉ अनिल चंद्रा ने बताया कि ओरल एंड मैक्जिलोफेशियल सर्जरी में चेहरे की विकृति, ओरल कैंसर, डेंटल इंप्लांट्स, स्टेम सेल थेरेपी टिश्यू इंजीनियरिंग व ट्यूमर इत्यादि प्रकार की सर्जरी की जाती है। इस दौरान डॉ दिव्या मेहरोत्रा सहित अन्य डाक्टरों ने भी सम्बोधित किया।












