लखनऊ। पीजीआई में सस्ती दवाओं के टेंडर में गड़बड़ी का आरोप लगा है। हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के टेंडर में कर्मचारियों की मिलीभगत भी है। आरोप हैं कि एक ही व्यक्ति की विभिन्न संस्थाओं को टेंडर आवंटित किया गया है। शिकायत के बाद शासन ने गड़बड़ी की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित बना दी है। कमेटी को 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी हैं।
पीजीआई में एचआरएफ के छह से ज्यादा दवा स्टोर का संचालन कि या जा रहा है। भर्ती मरीजों को बिस्तर पर दवा-सर्जिकल सामान उपलब्ध करा दिया जाता है। पीजीआई में पंजीकृत मरीजों को 30 से 70 प्रतिशत तक कम कीमत पर दवाएं मिल रही हैं। इन दवाओं की आपूर्ति के लिए संस्थान प्रशासन समय-समय पर टेंडर कराकर संस्थाओं का चयन करती है।
दिल्ली की कम्पनी ने पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन समेत शासन प्रशासन से शिकायत किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि एचआरएफ टेंडर के लिए 14 कंपनियों ने आवेदन किया था। जिसमें दस कंपनियों के आवेदन पर आपत्तियां लगाकर निरस्त कर दिया। आरोप हैं कि चार कंपनियों को टेंडर दे दिया गया। जब कि यह चारों कंपनियां एक ही व्यक्ति व उनकी पत्नी के नाम पर चल रही है। आरोप यह भी है कि अस्पताल के कर्मचारियों की मिलीभगत भी है। जिसकी जांच में पता चल सकता है। दवा टेंडर पर लगे आरोप के बाद अनु सचिव प्रेम शंकर तिवारी के आदेश पर दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। जांच टीम में चिकित्सा शिक्षा विभाग में विशेष सचिव अशोक कुमार व लोहिया संस्थान के वित्त अधिकारी मुकेश कुमार जैन शामिल है।












