लखनऊ। उम्र बीतने के साथ आंखों के मध्य भाग रेटिना में धब्बों के उभरने से नजर का कमजोर होने लगती है। इस कारण ऐज रिलेटेड मैकुलर डिजेनरेशन (एएमडी) और डायबिटिक मैकुलर एडीएमा (डीएमई) रेटिना के दो सामान्य रोग होने की संभावना रहती है, जो कि उम्र बीतने के साथ नजर को धुंधला कर सकते हैं। इसके लक्षणों और आंखों की जल्दी जांच करा करे समय से इलाज कराने से बीमारियों से बचा जा सकता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. उपशाम गोयल ने बताया कि रेटिना के रोगों की जल्द पहचान करने की जरूरत है। इन बीमारियों में आंखों की जल्द जांच और इलाज से रोग को प्रभावी तरीके से काबू करने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि एएमडी उम्र बीतने के साथ लगातार बढ़ने वाला रोग है, जो रेटिना के मध्य भाग, मैकुला को प्रभावित करता है, जो तेज और दूर तक देखने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होता है। इस बीमारी से आंखों के रेटिना के मध्य भाग में धब्बे हो सकते हैं, उनका आकार बिगड़ सकता है और ब्लाइंड स्पॉट आ सकते हैं। इससे रोजाना के कामों, जैसे पढ़ने, ड्राइविंग करने और चेहरे पहचानने में मुश्किल हो सकती है। राष्ट्रीय नेत्र संस्थान के अनुसार 50 वर्ष से ज्यादा की उम्र की लोगों में एएमडी दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण है। दूसरी ओर, डीएमई डायबिटीज से होने वाली जटिल बीमारी है। यह तब होती है, जब हाई ब्लड शुगर लेवल रेटिना की रक्तवाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
इन दोनों रोग से बचने के लिए आंखों की नियमित जांच कराना आवश्यक है। यह जांच डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को साल में एक बार करानी चाहिए। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रोल लेवल को काबू में रखना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से संबंधी आंख के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा स्वस्थ और संतुलित आहार लेना चाहिए, जिसमें विटामिन ए, सी और ई, बीटा कैरोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, ल्यूटिन, जैक्सेंथिन और जिंक शामिल हो।