बच्चों में मोटापे का स्वास्थ पर पड़ रहा गंभीर प्रभाव

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न्यूज। पिछले दो दशकों में दुनिया में मोटापे की समस्या से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई बच्चे कम उम्र में ही मोटापे की चपेट में आ जाते हैं। मोटापे का स्वास्थ पर गंभीर और कभी-कभी लम्बा प्रभाव देखने को मिलता है।
वर्ष 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 1.47 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे की समस्या से पीड़ित हैं।
मोटापा स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के लिहाज से जोखिम की एक ज्ञात स्थिति है। कोविड-19 महामारी के दौरान मोटापे की समस्या तेजी से बढी है जो स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है।

 

 

 

 

 

 


यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया और कुछ उपाय नहीं किए गए ,तो मोटापे से पीड़ित कई किशोर वयस्कों की तरह मोटे ही रहेंगे। मोटापे से पीड़ित कई बच्चे वयस्क होने से पहले ही यानि पूर्व किशोरा अवस्था में ही गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्यायों से पीड़ित होंगे।
इन समस्याओं का समाधान करने के लिए वर्ष 2023 की शुरुआत में ‘अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स’ ने 15 वर्षों में पहली बार मोटापा प्रबंधन संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मोटापा कैसे मापा जाता है———–
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) मोटापे को ‘असामान्य या अत्यधिक वसा संचय’ के रूप में परिभाषित करता है जो स्वास्थ्य के लिए बड़े जोखिम को पैदा करता है।
वसा संरचना को मापने के लिए विशेष उपकरण की आवश्यकता होती है जो सामान्य चिकित्सक के कार्यालय में उपलब्ध नहीं होती है। इसलिए अधिकांश चिकित्सक मोटापे की जांच के लिए शरीर के माप का उपयोग करते हैं।

 

 

 

 

मोटापे को मापने का एक तरीका है बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), यह बच्चे की लंबाई आैर वजन के आधार पर की जाने वाली गणना है। बीएमआई शरीर में वसा को नहीं मापता है, लेकिन जब बीएमआई अधिक होता है, तो यह शरीर में मौजूद कुल वसा से संबंधित होता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार जिस बच्चे का बीएमआई 85वें आैर 95वें पर्सेंटाइल के बीच होता है उसे मोटापे की श्रेणी में नहीं गिना जाता है।
बीएमआई के 95वें पर्सेंटाइल से अधिक होने पर उसे मोटापे की श्रेणी में गिना जाता है। मोटापे को मापने के लिए अन्य तरीकों में कमर की परिड़िड्डद्मध आैर त्वचा की तह की मोटाई शामिल है, लेकिन ये तरीके कम प्रचलित हैं।

 

 

 

 

गंभीर मोटापे से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, हड्डी आैर जोड़ों की समस्याएं शामिल हैं जो शुरुआती गठिया, उच्च रक्तचाप आैर गुर्दे की बीमारी का कारण बन सकती हैं।
इनमें से कई समस्याएं मोटापे से गंभीर रूप से पीड़ित बच्चे अथवा किशोर को एक साथ भी हो सकती हैं।

 

 

 

मोटापा यकृत को कैसे प्रभावित करता है————-
मोटापे से जुड़ी यकृत की बीमारी को गैर अल्कोहल वसा युक्त यकृत (नॉन अल्कोहल फैटी लीवर) नाम दिया जाता है। अतिरिक्त वसा आैर चीनी को संग्रहित करने के लिए यकृत की कोशिकाएं वसा से भर जाती हैं। लेकिन सूक्ष्मदर्शी से देखने पर बच्चों का वसा युक्त यकृत अल्कोहल के कारण क्षतिग्रस्त हुए यकृत के समान दिखता है।
वसा युक्त यकृत बच्चों आैर वयस्कों में गंभीर बीमारी का कारक बनता है।

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