अत्यधिक मोटे लोगों में अस्थमा का खतरा ज्यादा – प्रो हरलोकेश 

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*शारीरिक व्यायाम, उचित रहन-सहन, वातावरण परिसंस्करण बचा सकता है अस्थमा से*
*अस्थमा केयर फॉर ऑल विषय पर फार्मेसिस्ट फेडरेशन की वेबगोष्ठी*

 

 

 

 

 

 

 

 

लखनऊ। अस्थमा (दमा) एक प्रमुख गैर-संचारी रोग (एनसीडी) है, जो बच्चों और वयस्कों दोनों को प्रभावित कर सकता है और आजकल विभिन्न कारणों से फैलता जा रहा है, ये कभी-कभी घातक भी हो सकता है । इसलिए इसकी जानकारी, बचने के उपाय, उपचार आदि की जानकारी आवश्यक है । शारीरिक व्यायाम, उचित रहन-सहन, वातावरण परिसंस्करण आदि उपायों से इस बीमारी से बचा जा सकता है । बच्चों और बड़ों में बढ़ता मोटापा खतरनाक है, इनमे अस्थमा का खतरा ज्यादा हो सकता है । जागरूकता फैलाकर इसे रोकने का प्रयास करना होगा।

 

 

 

*बीटा 2 एगोनिस्ट ट्रैकिया को फैलाती है, ये दवाएं ट्रेकिया पर सीधा काम करे, इसलिए इन्हे इनहेलर के रूप में दिया जाना प्रभावी होता है । वहीं अस्थमा के मरीज को बीटा ब्लॉकर्स दवाएं देने से बचना चाहिए
उक्त बातें आज विश्व अस्थमा दिवस पर ‘ अस्थमा केयर फॉर ऑल ‘ विषय पर फार्मेसिस्ट फेडरेशन की वेब गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए फेडरेशन की साइंटिफिक विंग के चेयरमैन एम्स नई दिल्ली के प्रोफेसर हरलोकेश ने कही* । वेब गोष्ठी में फार्मा वैज्ञानिक, प्रोफेसर, हॉस्पिटल, क्लीनिकल फार्मेसिस्ट और छात्रों ने भी भागीदारी की ।
उन्होंने कहा कि अस्थमा के अटैक की संभावना शाम या रात को ज्यादा होती हैं इसलिए दवाएं शाम को अवश्य लेनी चाहिए दमा के मरीज को अपना इनहेलर हमेशा अपने साथ रखना चाहिए* जिससे जैसे ही उन्हें दमा के अटैक की शुरूआत पता चले तुरंत इनहेलर लेने से गंभीर स्थिति नहीं पैदा होगी ।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए फेडरेशन के अध्यक्ष एवं स्टेट फार्मेसी काउंसिल के पूर्व चेयरमैन सुनील यादव ने कहा कि अस्थमा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ‘ विश्व अस्थमा दिवस’ मई के पहले मंगलवार को प्रतिवर्ष मनाया जाता है जिसका विषय ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA) द्वारा निर्धारित किया जाता है ।

 

 

 

 

 

 

फार्मा वैज्ञानिकों, शिक्षकों ने कहा कि आजकल घरों में पालतू जानवर रखने का फैशन हो चला है जबकि शहरों में पालतू जानवरों के रखने की अलग जगह ज्यादातर नहीं होती है, जानवरों के गिरते बाल दमा पैदा कर सकते हैं ।
अस्थमा में आपके वायुमार्ग संकीर्ण हो जाते हैं, सूजन आ जाती है और अतिरिक्त बलगम भी पैदा हो सकती हैं जिससे सांस लेने में कठिनाई आती है. अस्थमा के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होते हैं, कुछ के लिए यह मामूली समस्या हो सकती है, जबकि अन्य के लिए यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकती है ।
*लक्षण*
सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न या दर्द, साँस छोड़ते समय सीटी बजना, घरघराहट, सोने में परेशानी आदि अस्थमा के एक सामान्य लक्षण है ।
*ट्रिगर्स*
पारिवारिक हिस्ट्री, प्रदूषण, धूम्रपान, वायरल श्वसन संक्रमण, मोटापा, तनाव, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रिफ्लक्स,
अत्यधिक व्यायाम या व्यायाम के दौरान अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं, विशेष रूप से जब हवा ठंडी और शुष्क होती है, कार्यस्थल में रासायनिक धुएं, गैसों, पेंट और एलर्जी से अस्थमा हो सकता है, जो पराग जैसे वायुजनित पदार्थों के कारण भी होता है। बीजाणु, धूल, तिलचट्टा अपशिष्ट आदि भी इसके ट्रिगर (कारक) हैं ।
प्राप्त आंकड़ों और विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार *बच्चों मे लड़कियों की तुलना में लड़कों में दमा होने की संभावना अधिक होती है, जबकि वयस्कों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अस्थमा होने की संभावना अधिक होती है।
अस्थमा ने 2019 में अनुमानित 262 मिलियन लोगो को प्रभावित किया
अस्थमा बच्चों में सबसे आम पुरानी बीमारी है।
पिछले एक दशक में अस्थमा से पीड़ित लोगों की संख्या में 15% की वृद्धि हुई ।

 

 

 

 

एक प्रश्न के उत्तर में श्री यादव ने बताया कि यह सच है कि आप अस्थमा को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकते, लेकिन ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप अस्थमा के साथ जीना आसान बना सकते हैं. और अस्थमा के दौरे की बारंबारता को कम कर सकते हैं।
गोष्ठी में आम जनता के लिए सलाह दी गई कि अस्थमा के लिए चिकित्सक द्वारा बताया गया इनहेलर अत्यंत सुरक्षित और प्रभावी होता है, इसलिए इनहेलर द्वारा कोई नुकसान होगा या उसकी आदत पड़ेगी इस मिथ को तोड़ा जाना आवश्यक है ।

 

 

 

 

*अगर दिन और रात में कई कई बार अस्थमा के दौरे पड़ रहे हैं नाखून, होंठ पीले सफेद या बाद में नीले कलर के होने लगे तो इसको इमरजेंसी स्थिति मानते हुए तत्काल इनहेलर लेकर नजदीकी चिकित्सालय में जाकर संपर्क करना चाहिए।
फेडरेशन ने देश की जनता से अपील की है कि स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर अपने आप को बीमारियों से बचायें, प्रकृति से छेड़छाड़ ना करें, चिकित्सक की सलाह के बगैर कोई औषधियां ना लें, साथ ही अपने फार्मेसिस्ट से सलाह लें , बर्फ सीधे खाना नुकसानदायक हो सकता है बदलते मौसम में सावधान रहें । गोष्ठी में महामंत्री अशोक कुमार, यूथ के अध्यक्ष आदेश, शरद मोहन , विवेक आदि ने अपने प्रश्न रखे जिसका जवाब सुनील यादव ने दिया ।

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