सरकार की मेडिकल व कपल पालसी हो रही नजर अंदाज
लखनऊ। प्रदेश राज्य कर विभाग के गाजियाबाद जोन दितीय मे तैनात उपायुक्त गिरीश कुमार का सोमवार को निधन हो गया, वे किडनी की जटिल बीमारी से ग्रसित थे। उनके निधन की खबर मिलते ही विभाग मे शोक की लहर दौड गयी। इस घटना के साथ ही विभाग मे तबादलो मे जटिल रोगो से ग्रसित अधिकारियों/ कर्मचारियों के लिए बनी मेडिकल पालिसी व दाम्पति नीति का नौकरशाह कितना पालन कर रहे है, इस पर चर्चा तेज हो गयी है। विभाग के संघ लगातार इस मुद्दे को उठाते भी रहे है, लेकिन हैरत की बात यह है कि विभाग मे करीब एक साल तक लोकतांत्रिक प्रकिया से चुनकर बने संगठनों को ही हाशिए पर रखकर उनकी जुबान को बंद कर दिया गया।
गिरीश चन्द्र की दोनो किडनी फेल हैं ये बात उस समय मीडिया की सुर्खियों मे आयी जब गिरीश कुमार की इस गंभीर बीमारी के बाद भी उनका तबादला गाजियाबाद कर दिया गया। गिरीश कुमार का इलाज लखनऊ मे चल रहा था, इसलिए उन्होंने अपने तबादले को निरस्त करने के लिए कई प्रत्यावेदन भी दिए। गिरीश कुमार ने उस समय मीडिया को बताया था कि उनकी पत्नी पति की बीमारी का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से भी मिलने गयी थीं, लेकिन मुलाकात न हो पाने पर वह प्रार्थना पत्र देकर चली आयी थी, लेकिन उनके पति का तबादला नही रुका।
जबकि वह जटिल रोग से ग्रसित थे। इसी तरह ऋषि भूषण पाठक जो कि बिजनौर मे उपायुक्त के पद पर तैनात थे, इनकी पत्नी का कैंंसर का इलाज वाराणसी मे चल रहा था इसी बीच इनका गोरखपुर तबादला हो गया, घर मे उनकी पत्नी व छोटी बच्ची की देख भल करने वाला कोई और न होने के कारण श्री पाठक लम्बे समय तक अवकाश पर रहे, जिससे उनका वेतन भी रुक गया और अन्त मे करीब छह माह पहले इनकी पत्नी का निधन हो गया।
इसी तरह मैनपुरी मे तैनात संयुक्त आयुक्त रोली निगम भी जटिल रोग से ग्रसित बतायी जा रही है उनके तबादले के प्रार्थना पत्र पर भी अभी तक विचार नही किए जाने से अधिकारियों मे मेडिकल व कपल पालसी को लेकर घोर निराशा है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत महसूस की जा रही है कयोंकि जिस विभाग के लिए परिवार के मुखिया ने पूरा जीवन दे दिया उसी विभाग मे संकट के समय सुनवाई न होने के गहरे जख्म इन अधिकारियों के दिलो मे हमेशा बने रहेगे।












