लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पीडियाट्रिक सर्जन डा. जेडी रावत ने नवजात शिशु के गैस्ट्रिक ट्यूब इसोफेगोप्लास्टी तकनीक से सर्जरी करके आहारनली बना दी। तीन चरणों में हुई इस सर्जरी में आहारनली बनने के बाद शिशु प्राकृतिक तरीके से दूध का सेवन कर रहा है आैर आगे भी उसे किसी प्रकार की दिक्कत होने की संभावना नहीं है। डा. रावत का कहना है कि यह सर्जरी काफी जटिल है आैर इसे बहुत कम ही विशेषज्ञों की सफल सर्जरी है।
चौक निवासी तेज बहादुर के अंश पटेल के जन्म के बाद जांच में पाया गया कि उसके आहारनली नहीं थी। इस कारण उसका पिलाया जाने वाला दूध उसकी पेट में न जाकर फेफड़े पास पहुंच रहा था जिसके कारण उसको संक्रमण बढ रहा था। इसके अलावा उसे छाती का संक्रमण भी बना हुआ था। परिजनों ने तत्काल शिशु को केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में डा. जेडी रावत के तहत भर्ती कराया। डा. रावत ने बताया कि आहारनली न बनने के कारण उसे कुछ तरल पदार्थ का सेवन करने में दिक्कत हो रही थी।

डा. रावत ने बताया कि सबसे पहले 27. 12. 2016 को सर्जरी करके खाने की नली को पेट से बनाया गया। इसके अलावा गले से थूक व स्लाइवा को निकालने के लिए ताकि छाती तक नहीं पहुंचे। इसके लिए गले से भी नली निकाल कर लगायी। ताकि वह दूध का स्वाद ले सके आैर उसे पीने की आदत बनी रहे। लगभग दस महीने बाद 29.11 2017 को पुन: जटिल सर्जरी की गयी। इस सर्जरी में जीआई कटर की मदद से आमाशय का एक भाग निकाल कर आहारनाल बनायी गयी। लगभग 15 सेमी आहारनाल को खाली स्थान पर जोड़ने के लिए छाती को भी ओपन नहीं किया गया।

कुछ दिन तक जब शिशु थोड़ा स्टैबल हो गया तो बीस फरवरी 2018 को गले से आहारनाल को जोड़ दिया गया। इसके बाद वह प्राकृतिक रूप से दूध का सेवन करने लगा आैर दूध भी सीधे आमाशय में जा रहा था। शिशु एक मार्च को डिस्चार्ज किया गया। उसे विभाग प्रमुख डा. एस एन कुरील ने दूध पिलाया। इस दिन शिशु का जन्म दिन भी था। उनकी सर्जरी टीम में डा. सुधीर सिंह, डा. गुरमीत सिंह, निश्चेतना विभाग की डा. हेमलता व सिस्टर वदंना मौजूद थी।
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