थायराइड ट्यूमर की बायोप्सी कराने की जरूरत नहीं

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लखनऊ। अब थायराइड के ट्यूमर में कैंसर है कि नहीं। इसका पता लगाने के लिये बायोप्सी की जरूरत नही है,बल्कि पीजीआई में स्थापित एलास्टोग्राफी तकनीक से पता चल जाएगा। यह जानकारी पीजीआई में चल रही इंटरनेशनल सोसाइटी आफ आंकोप्लास्टिक इंडोक्राइन सर्जन के अधिवेशन में डॉ.अमित अग्रवाल, डॉ. ज्ञान चंद और डॉ. सबारत्तनम ने बताया कि एलास्टोग्राफी एक तरीक़े का अल्ट्रा साउंड है। जिसमें ट्यूमर के कैंसर का पता लग जाता है। शनिवार को अधिवेशन में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डा. रजनीश दूबे ने कहा कि सरकार पीजीआई में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के हमेशा तैयार है। निदेशक डॉ.राकेश कपूर ने कहा कि 26 फरवरी तक संस्थान में रोबोट आ जाएगा, जिसके बाद रोबोटिक सर्जरी शुरू हो जाएगी।

डॉ. ज्ञान चंद बताते हैं कि थायरायड ग्रंथि का कैंसर ही ऐसा कैंसर है जिसका 100 फीसदी इलाज संभव है। जितनी जल्दी जांच की पुष्टि होगी। उतनी जल्दी इलाज से ये पूरी तरह से ठीक हो सकता है। 100 थायरायड ट्यूमर के केस में 20 से 25 फीसदी में कैंसरयुक्त ट्यूमर पाया जाता है है। ऑपरेशन कर पूरी ग्रंथि निकाल देते है। इसके बाद रेडियोआयोडीन थिरेपी देते है जिससे कैंसर के बचे हुए सेल भी मर जाते हैं। इसके आलावा थायरायड सप्रेशन थिरेपी दी जाती है। इन तीन चरणों के इलाज के बाद कैंसर पूरी तरह ठीक हो जाता है।

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