लखनऊ। खांसी के साथ खून आने की परेशानी से परेशान बरेली निवासी 22 साल के युवक को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने जांच कराई, जिसमें मरीज में तीन फेफड़े की पुष्टि होने पर डॉक्टर परेशान हो गये। डॉक्टरों ने फेफड़े के भीतर पनने तीसरे फेफड़े का जटिल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। गैरजरूरी तीसरे फेफड़े को ऑपरेशन कर मरीज को बीमारी से निजात दिलाने में कामयाबी हासिल की है।
बरेली निवासी 22 वर्षीय सुजीत (बदला नाम) को जन 2017 में खांसी के साथ खून आने की परेशानी हुई। परिवारीजनों ने स्थानीय अस्पताल में दिखाया। एक्सरे समेत दूसरी जांचें कराई। संक्रमण की आशंका जाहिर करते हुए डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक दी। इसके बाद भी मरीज को फायदा नहीं हुआ। इसके बाद डॉक्टर ने एक्सरे जांच की रिपोर्ट के आधार पर टीबी की आशंका जाहिर की। टीबी की दवा करीब एक साल चली। मर्ज और गंभीर हो गया। गंभीर अवस्था में परिवारीजन मरीज को लेकर पीजीआई पहुंचे। पीजीआई के डॉक्टरों ने छाती का सीटी स्कैन कराया। यहां फेफड़े में गांठ होने की बात कही गई। मरीज को केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग भेज दिया गया।
जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. सुरेश कुमार ने मरीज को देखा। दोबारा सीटी स्कैन कराया। इसमें तीसरे फेफड़े का पता चला। डॉ. सुरेश ने बताया कि 50 से 60 लाख की आबादी में एक व्यक्ति में तीन फेफड़े होते हैं। खास बात यह है कि एक के भीतर दूसरा फेफड़ा जन्म से होता है। इस फेफड़े को पेट की नस से खून की आपूर्ति होती है। जबकि सामान्य फेफड़ों को दिल की मोटी नस से खून मिलता है। हालांकि तीसरा फेफड़ा काम नहीं करता है। ये समस्या जन्म से होती है। चिकित्सा विज्ञान में इसे सिकोस्टेशन ऑफ लंग कहते हैं।
डॉ. सुरेश के मुताबिक दिसम्बर 2019 में मरीज के फेफड़े का ऑपरेशन हुआ। सबसे पहले पेट की नस से तीसरे फेफड़े को खून की आपूर्ति को रोका। बीमारी की जड़ बने तीसरे फेफड़े को ऑपरेशन कर हटा दिया। उन्होंने बताया कि इस फेफड़े का आकार सामान्य से काफी छोटा था। उन्होंने बताया कि पिछले हफ्ते मरीज फालोअप पर आया। मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य है। अब उसकी सारी दवाएं बंद कर दी गई हैं।
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