न्यूज। देश में तपेदिक (टीबी) को जड़ से समाप्त करने के लिए नयी एवं जनकेंद्रित खोज की शुरुआत की दिशा में तेजी लाने के लिये टाटा ट्रस्ट समर्थित संगठन आैर एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।
टीबी के समूल नाश के लिये वैश्विक लक्ष्य वर्ष 2030 निर्धारित किया गया है आैर भारत ने इससे पांच साल पहले यानी 2025 तक टीबी के पूर्ण खात्मे का लक्ष्य रखा है। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में ‘स्टॉप टीबी पार्टनरशिप” की बोर्ड मीटिंग के दौरान ‘स्टॉप टीबी पार्टनरशिप” आैर ‘इंडिया हेल्थ फंड” (आईएचएफ) ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।
एमओयू में टीबी देखभाल सेवाओं के आधुनिकीकरण आैर सेवा मुहैया कराने की जगह पर फोकस होगा। साथ ही भारत आैर अन्य टीबी ग्रसित देशों में इस संक्रामक रोग से प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बढाने की दिशा में संयुक्त पहल आैर ज्ञान साझा करने पर स्टॉप टीबी पार्टनरशिप की कार्यकारी निदेशक लुसिका डिटियू ने कहा, ”भारत से कई अविश्वसनीय प्रभावकारी समाधान मिले हैं आैर स्टॉप टीबी पार्टनरशिप का यह मानना है कि हमें न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में इन नयी खोज को जरूरतमंदों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।””
आईएचएफ के निदेशक मनोज कुमार ने कहा कि वर्ष 2030 तक टीबी मुक्त दुनिया आैर 2025 तक टीबी मुक्त भारत के दृष्टिकोण को पाना आशाजनक होने के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण है। भी जोर होगा। इसमें भारत में स्टार्टअप, छोटे एवं मझोवकास तथा इस पहल के समर्थन में सार्वजनिक एवं निजीले उद्यमों का समर्थन करने की बात कही गयी है। इसके अनुसार टीबी को लेकर नयी, जन केंद्रित खोज के िक्षेत्र में दानदाताओं आैर निवेशकों की पहचान की जायेगी।
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