लखनऊ । राजधानी में गैर जनपद के 1 मरीज की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है, इसके अलावा राजधानी की काफी मरीज में निजी से लेकर सरकारी अस्पताल तक भर्ती होने के लिए हो चुके हैं। अभी तक स्वास्थ विभाग के स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारियों संदेह किया जा रहा है । कुछ अस्पतालों में शॉर्ट एक्सपायरी दवा पहुंचने से हड़कंप मच गया, अस्पताल प्रशासन ने इन दवाओं को लौटा दिया । बच्चों के लिए स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए कोई सिरप नहीं दिया गया है । इमरजेंसी में अगर कोई बच्चा मरीज आ जाता है तो उसे गोली पीस कर दे दी जाती है। बताते चलें स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड आरक्षित करने के निर्देश दिये ,लेकिन बलरामपुर अस्पताल बने स्वाइन फ्लू वार्ड में दूसरी बीमारी के मरीज एडमिट किये जाते हैं।
स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए वार्ड नम्बर 11 बनाकर आठ बेड आरक्षित किए गए हैं लेकिन इन बेड पर वर्तमान समय में सांस, फेफड़े समेत अन्य गंभीर बीमारी के मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। सांस के मरीज भर्ती इस वार्ड में अंबेडकर नगर की बदामा भर्ती हैं, जो कि सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। अमेठी की पूनम को पेट की दिक्कत है। मरीज इरशाद प्लूरल इफ्यूजन से पीड़ित हैं। जबकि दूसरे अस्पतालों में स्वाइन फ्लू वार्ड को आइसोलेटेड रखा गया है। स्वाइन फ्लू जांच के लिए महज 10 किट ही बलरामपुर अस्पताल में हैं। वार्ड में जांच के लिए अलग से कोई काउंटर भी नहीं लगा है। टेमी फ्लू सिरप भी अस्पताल में नहीं है। सीएमओ कार्यालय से जो सिरप भेजे गए थे, वह शॉर्ट एक्सपायरी के थे, जिन्हें अस्पताल प्रशासन ने वापस भेज दिया। वर्जन अस्पताल के वार्ड 11 में डार्क रूम ही स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए आठ बेड का बनाया गया है। आसपास के दूसरे कमरों में सांस व अन्य दूसरी बीमारी के मरीज भर्ती किए जाएंगे। मरीजों के आने पर और किट मंगवाई जाएगी। -डॉ. राजीव लोचन, निदेशक
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