लखनऊ। अगर कमर तथा पीठ में लगातार दर्द बना रहे, तो विशेषज्ञ डाक्टर से तत्काल सलाह लेना चाहिए। यह स्पाइन की दिक्कत हो सकती है। नब्बे प्रतिशत लोग दवाओं से ठीक हो जाते है आैर दस प्रतिशत लोगों को सर्जरी करानी पड़ती है। यह जानकारी पुणे के स्पाइन सर्जन डा. गौतम जावेरी ने किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के आर्थोपेडिक्स विभाग की स्पाइन सर्जरी यूनिट की ओर से आयोजित एएसएसआई स्पाइन आउटरीच प्रोग्राम 2019 को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में अन्य विशेषज्ञों ने भी स्पाइन इंजरी व बचाव के बारे में जानकारी दी।
डा. गौतम जावेरी ने कहा कि एक्सीडेंटल मामलों में 30 से 35 प्रतिशत मरीजों में स्पाइन की डायग्नोसिस अक्सर छूट जाती है, वहीं से स्पाइन की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि अगर एक्सीडेंट के बाद स्पाइन में किसी भी तरह का दर्द व भारीपन का अहसास हो, तो डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। इससे अगर पैरालसिस होने की आशंका को रोका जा सकता है। डा. जावेरी ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद स्पाइन में कहीं भी हल्का दर्द हो तो डाक्टर को जरूर बताना चाहिए। डाक्टर को भी रीढ़, कंधे, कमर का गहनता से परीक्षण करना चाहिए। इसके जरिए भविष्य में पैरालसिस सहित अन्य बड़ी समस्याओँ से बचा जा सकता है। इस दौरान आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ विनीत शर्मा, डॉ आरएन श्रीवास्तव डा. संतोष कुमार स्पाइन इंजरी के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता व चेन्नई से आए विशेषज्ञों ने स्पाइन की टीबी, बच्चो व वयस्कों में होने वाले कमर दर्द के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में लखनऊ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के करीब 100 आर्थोपेडिक सर्जन ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के आयोजन सचिव डा. शाह वलीउल्लाह ने कहा कि आफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर काम करने वालों को कमर दर्द की शिकायत ज्यादा होती है। इसके लिए बैठना का तरीका बदल कर कुर्सी पर सीधा बैठने की आदत डालनी चाहिए। तरीका यह होता है कि न आगे झुक कर बैठे और न ही ज्यादा पीछे की तरफ से खिंचाव हो। इसके अलावा सोते समय पतली तकिया का प्रयोग करें, जो सिर और कंधे के बीच समन्वय स्थापित कर गर्दन को सपोर्ट दे। इसी तरह दो हफ्ते तक लगातार कमर दर्द के साथ पैरे में झनझनाहट हो तो, शरीर के किसी हिस्से में सून्न सा महसूस हो और दस्त व पेशाब आने का पता न लग पाए, तो तत्काल जांच करानी चाहिए।
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