लखनऊ। ऊपरी जबड़े में कैंसर हो जाने पर सर्जरी के बाद जबड़ा लगभग समाप्त हो जाता है। कैंसर के ऑपरेशन के बाद रेडियोथेरेपी के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए दंत संकाय के प्रास्थोडॉटिक्स विभाग के डॉ. बालवेन्द्र प्रताप सिंह ने वैलून फॉर टीशू वोलस डिवाइस बनाई है। इसके प्रयोग से मुंह के ऊपरी जबड़े की रेडियोथेरेपी होने पर आस-पास की स्किन में होने वाली परेशानी कम की जा सकती है। इस उपलब्धि के लिए शनिवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रिसर्च शोकेस 2017 में डॉ. बालवेन्द्र को प्रो. धवेन्द्र कुमार यंग इनवेस्टिगेटर अवार्ड से सम्मानित किया गया। ब्रााउन हाल में आयोजित कार्यक्रम में मेडिकल साइंस के विभिन्न क्षेत्रों में शोध करने वाले विभिन्न विभागों के दो दर्जन से अधिक डॉक्टरों को पुरस्कृत किया गया।
डॉ. बालवेन्द्र ने बताया कि वैलून फॉर टीशू वोलस डिवाइस में एक प्लेट के सहारे बैलून बंधा रहता है। इसको तालू में लगा दिया जाता है। बैलून में तरल पदार्थ डाला जाता है, जिससे बैलून फूल कर घेरा बना लेता है। इसके प्रयोग से मरीज का सटीक उपचार किया जा सकता है। इस दौरान कार्यक्रम में मुुख्य अतिथि प्रो.हरि गौतम ने सम्बोधित करते हुए कहा कि यदि हम इंडिया को खोजते है कि वह कहां है तो मेरा उत्तर होगा कि केजीएमयू मे इंडिया है। प्रो. गौतम ने कार्यक्रम में उपस्थित संकाय सदस्यो, शोधार्थियों से कहा कि किसी व्यक्ति की अकेले उन्नति नही हो सकती है।
कार्यक्रम केजीएमयू के कुलपति प्रो. मदनलाल ब्रह्म भट्ट ने कहा कि चिकित्सा विश्वविद्यालय में 400 से ज्यादा संकाय सदस्य है। यह बड़े ही उत्साह की बात है यहां प्रत्येक वर्ष 600 से ज्यादा शोध एवं पेपर प्रकाशित होते है। इस वर्ष चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा 25 अविष्कारो एवं शोध को पेटेंट कराने के लिए आवेदन किए गये है। चिकित्सा विश्वविद्यालय के सारे शोध इथिकल बेस्ड किया जाता है जो अंतर्राष्ट्रीय गाइड लाइन के अंतर्गत होते है। संस्थान को इंस्टीट्यूट ऑफ इमिनेंस का दर्जा मिल जाने पर बहुत सारी स्वयत्ता एवं बजट केंद्र सरकार से प्राप्त होने लगेंगे।
इनका हुआ सम्मान
शोध कार्य के लिए डॉ. साकेत कुमार,डॉ. कौशल किशोर अग्रवाल, डॉ. प्रीती अग्रवाल डॉ. अनित परिहार, डॉ. मिली जैन,डॉ.शिवानी पाण्डेय, डॉ. एसपी जैसवार, डॉ. राजेश वर्मा, डॉ प्रशांत गुप्ता व बेस्ट पीएचडी थीसिस अवार्ड के लिए मोनिका शंखवार को सम्मनित किया गया।











