लखनऊ। ट्रामा सेन्टर में शनिवार शाम आग घटना के बाद से बलरामपुर अस्पताल के बाद मरीजों के पहंुचने का सिलसिला खत्म हुआ। सायं 7:30 बजे से रात 12 बजे तक 37 मरीज पहुंचे आैर रविवार शाम तक 28 मरीज आए। ऐसी स्थिति में अस्पताल की 40 बिस्तरों की इमरजेंसी फुल हो गयी। इमरजेंसी मेडिकल आफीसर डा. अतुल मेहरोत्रा ने बताया कि ट्रामा सेन्टर में आग की घटना लगने के बाद ही व्यवस्था चौक-चौबंद की गयी। सात विशेषज्ञ चिकित्सकों को आनकाल बुलाया गया। अतिरिक्त बिस्तर लगाने की व्यवस्था है, जहां गंभीर मरीज एडमिट नहीं किये जा सकते हैं।
अस्पताल के निदेशक डा. ईयू सिद्दीकी ने बताया कि पुरातत्व विभाग के नियमों के अनुसार बहुमंजिला इमारत नहीं बनायी जा सकती है। ऐसी स्थिति में अस्पताल का बहुत विस्तार नहीं कर सकते हैं। आईसीयू लगाने का प्रस्ताव भेजा चुका है, यूनिट लगने पर इमरजेंसी में कुछ बिस्तरों का इजाफा होगा। अस्पताल में कुल 726 बिस्तरों की क्षमता है, इनमें 90 प्रतिशत बिस्तर फुल हो चुके हैं। दूसरी तरफ केजीएमयू से रेफर होकर डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल में तीन मरीज एडमिट हुए हैं, उनकी हालत में सुधार हो रहा है। यहां पर 30 बिस्तरों की इमरजेंसी भी मरीजों से फुल हो चुकी है। हालांकि, डेंगू, स्वाइन फ्लू आैर चिकनगुनिया के मरीजों के आरक्षित वार्ड को छोड़कर 85 प्रतिशत मरीजों की भर्ती संख्या पहंुच गयी है।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आशुतोष दुबे ने बताया कि सूचना विभाग की भूमि मिलने पर अस्पताल का विस्तार होना है, इसके लिए बहुमंजिला बिल्डिंग का नक्शा भी तैयार हो चुका है। इस दिशा में काम कब शुरू होगा, इसके जवाब में उन्होंने बताया कि अभी शासन स्तर से अनुमित नहीं मिली है। गोमतीनगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में केजीएमयू के 22 मरीज एडमिट हुए हैं। यहां भी 44 बिस्तरों बिस्तरों की इमरजेंसी मरीजों से फुल हो चुकी है। हालांकि, जिन मरीजों की हालत में सुधार हो रहा है, उन्हें वार्ड में शिफ्ट करने का क्रम जारी है।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. ओमकार यादव बताते हैं कि अक्सर इमरजेंसी फुल रहती है। इस समय मेडिसिन वार्ड व गायनी वार्ड में मरीजों से फुल चल रहा है। जहां तक विस्तार की बात है तो अस्पताल को संस्थान में मर्ज होना है। इसके बाद कोई नयी नीति बनेगी।












