संवेदनहीनता ने ली युवक की जान

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केजीएमयू स्थित ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली। ट्रेन हादसे में जख्मी युवक के पैर में कीड़े पड़ गए थे। छह दिन तक वार्ड में पड़ा सर्जरी का इंतजार करता रहा। जब जख्म से बदबू आने लगी तो सर्जरी कर उसका पैर काटा गया। इस दौरान मरीज को संक्रमण लग गया। सोमवार देर रात इलाज दौरान ट्रॉमा सेंटर में उसकी मौत हो गई। घटना से गुस्साएं तीमारदारों ने आर्थोपैडिक डॉक्टरों को युवक की मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए हंगामा किया। सूचना पर आई पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत सेप्टीसीमिया की
वजह से होने की पुष्टिï हुई है।

मालूम हो कि, गोंडा के रहने वाले सर्वेश यादव (२६) का बायां पैर ट्रेन से हुए हादसे में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। पैर काटना ही विकल्प बचा था। गोंडा के जिला अस्पताल से मरीज को करीब छह दिन पहले ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। कैजुअल्टी में भर्ती होने के बाद मरीज को ऑर्थोपैडिक वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने जांच कराई और ओटी का सामान मंगवा लिया। छह दिन बीत गए मगर डॉक्टरों ने उसका पैर नहीं काटा। वार्ड में भर्ती रहने के दौरान उसके पैर में कीड़े पड़ गए।

तीमारदार डॉक्टरों के आगे गिडगिड़ाते रहे मगर सुनवाई न हुई। शनिवार देर रात डॉक्टर मरीज को ओटी में ले गए और उसका पैर काटा गया। इसके बाद उसे लिंब सेंटर शिफ्ट कर दिया गया। सोमवार देर रात उसका शरीर ऐंठने लगा। आनन फानन में तीमारदार उसे लेकर ट्रॉमा कैजुल्टी ले गए। वहां पर उपचार दौरान उसकी मौत हो गई। तीमारदार दुर्गेश ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हंगामा किया। सूचना पर आई पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेजा। जहां उसकी मौत सेप्टीसीमिया से होने की पुष्टिï हुई है।

छह दिन तक पैर सडऩे के बाद डॉक्टरों ने जांच और सर्जिकल उपकरण दवाएं मिलाकर करीब ५० हजार रुपये खर्च करवा दिए। तीमारदार दुर्गेश का आरोप है कि डॉक्टरों ने कमीशन के चलते निजी पैथोलॉजी से जांच कराई। जबकि केजीएमयू में जांच की सुविधा मौजूद थी। इसे लेकर तीमारदारों ने केजीएमयू प्रशासन से भी शिकायत की मगर कोई सुनवाई न हुई। इतना ही नहीं दुर्गेश का कहना था कि जब मरीज का शरीर पीला पडऩे लगा था। ऐसे में डॉक्टरों ने जांच लिखी और दवाएं बंद कर दी।

आरोप है कि कई दफा डॉक्टरों से इलाज के लिए सीनियर डॉक्टरों को बुलाने के लिए कहा गया मगर कोई झांकने तक नहीं आया। देर रात अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। आनन फानन में उसे एंबुलेंस से ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। वहां कैजुल्टी में दो घंटे चले उपचार बाद उसकी मौत हो गई।

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