लखनऊ। गोमती नगर के डा. राम मनोहर लोहिया संस्थान में सल्फास खाए मरीज की जान बचाने में कामयाबी पायी है। यहां के डॉक्टरों ने सल्फास खाने के बाद गंभीर हालत में आये मरीज का तीन वेंटिलेटर पर इलाज करने के बाद नया जीवन दान दे दिया है। डाक्टरों के अनुसार मरीज का 60 प्रतिशत हार्ट जवाब दे चुका था। कानपुर निवासी रंजीत (बदला हुआ नाम) ने सल्फास खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। परिजनों ने उन्हें कानपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर गंभीर अवस्था में डॉक्टरों ने मरीज को लोहिया संस्थान भेज दिया। संस्थान में एनस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक मालवीय, डॉ. पीके दास और डॉ. सूरज कुमार ने मरीज की जांच करा कर इलाज करने का निर्णय लिया। जांच पड़ताल के बाद मरीज को वेंटिलेटर पर रखने का फैसला हुआ।
डॉ. पीके दास ने बताया कि मरीज के हार्ट व मस्तिष्क पर जहर का असर हो गया था। शरीर के दूसरे अंग भी जहर के कारण प्रभावित हो रहे थे। वेंटिलेटर भर्ती रहने के बाद उसकी सेहत में सुधार के बाद ही मरीज की डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉ. पीके दास ने बताया कि गेहू को कीड़ा से बचाने के लिए सल्फास का प्रयोग किया जाता है। इस जहर को बेअसर करने की कोई दवा बाजार में अभी तक नहीं है। इस जहर में एल्युमूनियम फास्टफाइड पाया जाता है। इसकी महज आधी गोली से मरीज की जान जा सकती है। महज पांच से 10 प्रतिशत मरीज ही बच सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि किसी ने जहर खा लिया तो उसे जल्दी उल्टी कराएं। नारियल का तेल पिलाएं। इससे जहर के असर को कम किया जा सकता है।
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