उच्चकोटि के चिकित्सकीय सेवायें उपलब्ध कराना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

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उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पीजीआई में पी.एस.ए. ऑक्सीजन प्लांट व न्यूरो फिजियोलॉजी
लैब का लोकार्पण किया

 

 

 

 

 

लखनऊ। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आज संजय गाँधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में डाक्टर्स फार यू की पहल पर गिब इंडिया (एनजीओ) के सौजन्य से पी.एस.ए. ऑक्सीजन प्लांट व न्यूरो फिजियोलॉजी लैब का लोकार्पण किया। लोकार्पण कार्यक्रम में बोलते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एसजीपीजीआई की कार्यशैली की प्रशंसा की और कहा कि यहां प्रत्येक रोगी को समान संवेदना और सेवा भाव से देखा जाता है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों को मंदिरों के समकक्ष और चिकित्सक को ईश्वर की संज्ञा दी गई है। उन्होंने कहा कि कभी कभी भर्ती के लिये बेड की अनुपलब्धता एक समस्या हो सकती है, पर यदि रोगी को ध्यान पूर्वक सुन लिया जाए तो उसकी पीड़ा कुछ हद तक कम हो जाती है और इसमें जनसंपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने हेतु निरन्तर प्रयासरत है। बिस्तरों की संख्या को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। ब्रजेश पाठक ने कहा कि सभी को उच्चकोटि के चिकित्सकीय सेवायें उपलब्ध कराना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। प्रदेश के समस्त चिकित्सालयों एवं चिकित्सा संस्थानों में मानव संसाधन एवं अन्य आवश्यक संसाधनों को बढ़ाने के लिए सरकार आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने स्टाफ की समस्याओं को भी समय सीमा के अंदर निराकरण का आश्वासन दिया।

 

 

 

न्यूरो फिजियोलॉजी लैब शुरू होने से क्लीनिकल न्यूरोफिजियोलॉजिकल लैब में मस्तिस्क, मेरुदण्ड , स्पाइनल कार्ड नसों तथा मासपेशियों की बीमारियो से ग्रसित मरीजों की जाँच हो सकेगी। इसमें मिर्गी की बीमारी से ग्रसित मरीजों का मूल्यांकन तथा इलाज के लिए वीडियो इलेक्ट्रोइंसोफिलोगारम ई ई जी द्वारा दिमाग से उत्पन्न बिजली कि तरंगों का विश्लेषण कर के मिर्गी के प्रकार का पता किया जाता है। 15 से 20 प्रतिशत मिर्गी के मरीज जो कि दवा से ठीक नही हो पाते उनके लिए शल्य चिकित्सा के लिए भी वीडियो इलेक्ट्रोइंसोफिलोगारम (ई ई जी) की अहम भूमिका रहती है। इसके अलावा नसों से संबंधित मरीजों के लिए मशीन द्वारा रोगी के नसों में विघुत प्रवाह के माध्यम से बीमारी का पता लगाया जा सकता है इसी प्रकार मांसपेसियों से उत्पन्न होने वाले सूक्षम विद्युत तरंगों की जांच के लिए भी विभिन्न प्रकार की तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। जिससे मांसपेसियों की बिमारियां जैसे मांसपेशीय दुर्विकास (मुस्कलर डायसट्राफी) और विभिन्न प्रकार की मायोपैथी का विशलेषण किया जाता है। मैग्नेटिक सिटीमुलैशन के द्वारा सर दर्द के मरीजों को बिना दवा के ठीक किया जाता है। मस्तिस्क की धमनियों में खून के प्रवाह में रूकावट के लिये भी ट्रांसकारनियल डाप्लर का उपयोग भी क्लीनिकल न्यूरोफिजियोलॉजिकल लैब में किया जाता है। संस्थान के निदेशक द्वारा मुख्यमंत्री को सम्मान स्वरूप एक स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। तत्पश्चात मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर गौरव अग्रवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस दौरान निदेशक एसजीपीजीआई, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, विभिन्न विभागाध्यक्ष संस्थान के अधिकारीगणांे व अन्य उपस्थित थे।

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