लखनऊ। पीजीआई के एचआरएफ के सर्जिकल स्टोर में पेशेंट हेल्पर (मरीज सहायक) 10 दिन से फर्जी तरीके से नौकरी कर रहा था। एचआरएफ( हास्पिटल रिवाल्विंग फंड) के अधिकारियों को संदेह होने पर पूछताछ निुयक्ति के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। सख्ती करने पर युवक ने फर्जी नौकरी देने वाले एचआरएफ के तीन कर्मचारियों के नाम बताएं। इन्होंने नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लिये थे। नियुक्ति पत्र जारी ज्वाइन भी कराया। एचआरएफ के चेयरमैन ने फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे युवक के साथ ही नौकरी दिलाने वाले गिरोह के तीन सदस्यों संस्थान से बाहर निकाल दिया।
संस्थान के एचआरएफ ( हास्पिटल रिवाल्विंग फंड) के स्थायी कर्मचारी दीपक को स्टोर में नया युवक दिखने पर संदेह हुआ। उसने इसकी जानकारी एचआरएफ प्रभारी अभय मेहरोत्रा और सहायक प्रभारी एसके श्रीवास्तव ने जब पीड़ित युवक जतिन से संस्थान में नौकरी देने वाली आउट सोर्सिंग कम्पनी के बारे में पूछा तो वह हड़बड़ा गया। जतिन को भरोसे में लेकर नौकरी दिलाने के बारे में पूछा तो जतिन ने एचआरएफ कैंप के आउट सोर्सिंग कर्मचारी रजनीश , देवेश, हिमांशु के नाम लिए। इन तीनों ने रुपये लेकर नौकरी दी है। सर्जिकल स्टोर में जतिन 10 दिन से काम कर रहा था। फर्जीवाड़े की जानकारी होने पर दूसरे विभागों के अधिकारियों ने भी कर्मचारियों की पड़ताल शुरू कर दी है।
निदेशक डा आर के धीमन ने मामले की जानकारी लेकर जरूरी होने पर नौकरी दिलाने वाले गिरोह के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे।












