लखनऊ। पीजीआई में लाखों रुपये का दवा घोटाला सामने आने के बाद हड़कम्प मच गया है। बताया जाता है कि अगर जांच सही तरीके से हुई तो संविदा कर्मियों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। फिलहाल पीजीआई प्रशासन नयी व्यवस्था के तहत बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इससे मरीज के नाम पर दूसरा कोई दवा नहीं ले सकेगा। उधर आरोपी आठ संविदा कर्मियों को पीजीआई आने पर रोक लगा दी गयी है।
पीजीआई में मरीजों के लिए अलग सहायता कोष से आने वाले रुपयों से इलाज कराने वाले मरीजों के खाते से लगभग 55 लाख रुपये की दवा निकालने का मामला प्रकाश में आया है। इस प्रकरण में जांच के लिए कमेटी बनी है। अगर सूत्र माने तो जांच कमेटी ने तेजी से काम शुरू करते हुए रविवार को भी पड़ताल शुरू कर दी है। अगर जानकारों की माने तो पीडी एकाउंट (पोस्ट डिपाजिट) में गड़बड़ी की जा सकती है। जिन मरीजों के इलाज के लिए उनके खाते में सहायतो कोष से राशि भेजी जाती है। बताते है कि इलाज के बाद मरीज तो चला जाता था लेकिन पीडी एकाउंट के शेष धनराशि पर वह ध्यान नहीं दे पाता है। ऐसे में सक्रिय लोग इनके शेष रुपयों से दवा निकलवाते थे, इसके लिए दवा निकलवाने के लिए डाक्टर का पर्चा और सहमति पत्र फर्जी तरीके से बनवाया जाता है, जिसमें हस्ताक्षर भी फर्जी होते थे। दवा लेते और पैसे मरीज के पीडी एकाउंट से पेमेंट कर देते थे, लेकिन इस बार घोटाला कर रहे लोगों ने गड़बड़ी कर दी आैर उस मरीज के पीडी एकाउंट से दवा निकाल जिसका इलाज ही पूरा नहीं हो पाया था। बताते है कि जब दस दिन पहले मरीज को भर्ती किया जाने लगा आैर भर्ती होनेके लिए पीडी सेल में भुगतान के लिए मरीज के पंजीकरण नंबर पर धनराशि ट्रांसफर कराने के लिए गया, तो बताया गया कि खाते में पैसा ही नहीं है। वह भागा- भागा वह अपने डाक्टर के पास पहुंचा तो डाक्टर भी हैरान हो गये। उसके इसकी शिकायत निदेशक , मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों से शिकायत दर्ज करायी। शिकायत के आधार पर ही ओपीडी फार्मेसी के कर्मचारियों पूछताझ करने पर इस प्रकरण का खुलासा हुआ, जिसको कर्मचारियों ने स्वीकार भी किया।












