PGI: इलाज के लिए दिए गए मुख्यमंत्री, विधायक कोष में लाखों का घोटाला

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लखनऊ। पीजीआई में मुख्यमंत्री कोष, सरकारी विभागों व विधायकों के कोष से मरीजों के इलाज के लिए आयी धनराशि में लाखों का घोटाला का खुलासा हुआ है। इस धनराशि से मरीजों का इलाज एवं दवाओं की खरीद फरोख्त की जाती है। धनराशि में लाखों का घोटाला पकड़े जाने पर पीजीआई निदेशक गायब होने पर आठ संविदा कर्मचारियों पर प्राथमिकता पीजीआई थाने में दर्ज कराई गयी। इसके अलावा पीजीआई प्रशासन ने भी संविदा कर्मियों सहित अन्य लोगो को दोषी पाते हुए जांच कमेटी गठित कर दी है।
संस्थान की नवीन ओपीडी फार्मेसी में मरीजों को सस्ते दरों पर दवा मिलती हैं। इन दवाओं की फार्मेसी से पीईडी एकाउंट में मरीजों की दवाओं के लिए इलाज कर रहे डाक्टरों का पर्चे और बुक में मरीजों की फोटो लगी रहती है आैर दवायें लिखी जाती है। शिकायत है कि पीजीआई की फार्मेसी में पीईडी एकाउंट की दवाओं का बिल बनाया गया आैर मरीज के एकाउंट से धनराशि निकल गयी, लेकिन मरीज को दवा व अन्य दर्ज सुविधा भी नहीं मिली। इसकी शिकायत काफी मरीजों ने पीजीआई प्रशासन से की। इस प्राथमिक जांच में लाखों की धनराशि के घोटाले का खुलासा होने के बाद पीजीआई प्रशासन सकते है। आनन-फानन में एक कमेटी गठित की गई। कमेटी ने संविदा कर्मचारियों सहित कई अन्य लोग को प्राथमिक जांच में दोषी पाया। निदेशक प्रो आर के धीमान, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सोनिया नित्यानंद और चेयरमैन एच आरएफ प्रो. वीके सारस्वत ने ओपीडी फार्मेसी में तैनात लेखा विभाग और फार्मेसी में तैनात समस्त कर्मियों से बयान लिया गया। लेकिन इस लाखों रुपये के हुए घोटाले की पीजीआई के सुरक्षा अधिकारी मनोज सक्सेना ने पी जी आई थाने में शिकायत दर्ज करायी। रिपोर्ट में ओपीडी की एचआरएफ फार्मेसी में संविदा कर्मी नपेन्द्र सिंह, मो. नदीम ,पंकज कुमार, आशुतोष कुमार, अरविंद कुमार, विनीत शुक्ला यह एकाउंड सेक्शन में तैनात है। इसके अलावा एकाउंट में हरिशंकर तिवारी, अनिल यादव नाम रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है। रिपोर्ट में लाखों की दवा व रुपयों घोटाला तथा इसमें फर्जी हस्ताक्षर का प्रयोग का आरोप है।

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