लखनऊ। संजयगांधी पीजीआई में लगातार दो मरीजों को बिना कोरोना की रिपोर्ट के इलाज करने के बाद संक्रमण फैलने की घटना को शासन ने गंभीरता से लिया है। मरीज को कोविड 19 हास्पिटल से बुलाकर कैथलैब में पेसमेकर लगाने के बाद उसे संक्रमण फैलने के बाद कैथ लैब व आईसीयू को बंद करना पड़ा। लगातार दो घटनाएं होने पर शासन ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है।
बताते चले कि गोरखपुर की बरगवा निवासी 60 वर्षीय महिला के कोरोना की रिपोर्ट आने से पहले ही कार्डिंयक में दिक्कत होने पर मरीज को पेसमेकर लगा दिया गया। मरीज की कोविड की जांच के 24 घंटे भी नहीं बीते थे आैर रिपोर्ट भी नहीं आयी थी। पीजीआई के डाक्टरों ने कोरोना की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर वार्ड में शिफ्ट कर सर्जरी की प्रक्रिया कैथ लैब में शुरू कर दी और आनन- फानन में मरीज को सर्जरी करके वाडॅ में भेज दिया। उसी रात को मरीज की रिपोर्ट में कोरोना पाजीटिव आ गयी। जिस पर कैथलैब को सील करके आईसीयू में भर्ती मरीजों को स्वाइन फ्लू में शिफ्ट करना पड़ा। इससे पहले भी ओपीडी में बिना जांच के डायलिसिस के लिए बुलाने के बाद कोरोना पाजिटिव निकले की घटना हो चुकी है। जिस पर ओपीडी को बंद करना पड़ा था।
इस लापरवाही की गम्भीरता को देखते हुए शासन ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। चिकित्सा शिक्षा के विशेष सचिव आलोक पांडेय की ओर से जारी निदेँश मे लोहिया संस्थान के सीवीटीएस विभागाध्यक्ष प्रो एस एस राजपूत पी जी आई के विभागाध्यक्ष प्रो अमित गुप्ता तथा के जी एम यू के पल्मोनरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष प्रो सूर्य कान्त को जिम्मा सौंपा गया है।
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