पीजीआई के 23 वें दीक्षांत समारोह में 162 को दी जाएगी डिग्री

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लखनऊ । संजय गांधी पीजीआई अपना 23 वें दीक्षांत समारोह मनाने जा रहा है। समारोह में 162 छात्रों को मिलेगी डिग्री को डिग्री राज्यपाल के हाथों प्रदान की जाएगी। समारोह में 37 छात्रों को डीएम, 16 छात्राों को एमसीएच, चार छात्रों को पीएचडी , 19 छात्रों को एमडी, सात छात्रों को एमएचए, 44 छात्रों को पीडीसीसी, 35 छात्रों को बीएससी नर्सिग की डिग्री दी जाएगी। इनमें से 57.4 फीसदी छात्र है और 42.6 फीसदी छात्राएं है। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल राम नाइक करेंगे। मुख्य अतिथि बाल रोग विशेष एवं नीति आयोग के सदस्य डा. विनोद पाल होंगे।

डा. विकास गुप्ता को मिला बेस्ट प्रो.आरके शर्मा बेस्ट डीएम सम्मान मिला है।
डा.गुप्ता ने बताया कि इस अवार्ड को अपने टीचर प्रो.आरएन मिश्रा, प्रो.अमिता अग्रवाल,प्रो.विकास अग्रवाल सहित अन्य के अलावा अपने पिता विनोद गुप्ता और मां आशा गुप्ता को समपर्ति किया है। इन सभी से मनोबल बढ़ता है। लुधियाना के रहने वाले डा.विकास की पत्नी डा.नवकीर्ती भी यहीं पर सीनियर रेजीडेंट है। इनके नाम 19 शोध पत्र है, जो विश्व स्तर पर स्वीकार किए गए हैं।
शोध छात्र डा. विजय को मिला प्रो.एसएस अग्रवाल बेस्ट रिसर्च अवार्ड दिया गया है।

न्यूरोलाजी विभाग के डा. विजय कुमार को विल्सन डिजीज के कारण याददाश्त और सीखने की क्षमता में कमी का पता लगाने के लिए इस साल का प्रो.एसएस अग्रवाल बेस्ट रिसर्च एवार्ड दिया गया है। डा.विजय ने विभाग की प्रो. जे कलिता और प्रो.यूके मिश्रा के देख-रेख में शोध को अंजाम दिया है। इनके शोध को विश्व स्तर पर स्वीकार किया गया है। ।

देश के पहले पीडियाट्रिक गैस्ट्रो इंट्रोलाजी विशेषज्ञता के संस्थापक को मिला प्रो.एसआर नायक एवार्ड

संजय गांधी पीजीआई के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोइंट्रोलाजी विभाग के संस्थापक प्रो. एसके याचा को दिया जाएगा। प्रो. याचा को इस साल का प्रो.एसआर नायक एवार्ड फार आउट स्टैडिंग रिसर्च इनवेस्टीगेटर संस्थान के 23 वें दीक्षांत समारोह में दिया जाएगा। प्रो.याचा के नाम 160 से अधिक रिसर्च पेपर हैं। बच्चों में तमाम पेट की बीमारी का पता लगाया जो पहले देश में कोई जानता नहीं था। इस बीमारी से बच्चे मर जाते थे, लेकिन अब इन बीमारियों से ग्रस्त 80 फीसदी बच्चे अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। देश का पहला संस्थान है जहां यह विभाग है। देश के पीडियाट्रिक गैस्ट्रो इंट्रोलाजिस्ट तैयार कर रहा है। प्रो. याचा के बीते पांच साल के 10 शोध पत्र ऐसे जिसका इंपैक्ट फैक्टर 35 के आस -पास है। स्वर्गीय प्रो.एस आर नायक संस्थान के गैस्ट्रो इंट्रोलाजी विभाग के संस्थापक थे इनके नाम पर हर साल एवार्ड दिया जाता है। प्रो.याचा बताया कि उनके सहयोग और प्रेरणा से यह विभाग स्थापित हुआ।

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