लखनऊ । किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में पंजीकरण के नाम पर मरीजों को कागज के टुकडें पर बार कोड चिपका कर दिया जा रहा है, जबकि पहले मरीज को लेमिनेशन कार्ड पर ही बार कोड दिया जाता था। टेंडर देर होने दावा करते हुए लेमिनेशन कार्ड कई महीनों से बन रहे है। कागज पर चिपका बार कोड अक्सर गायब हो जाता है, जिससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। केजीएमयू प्रशासन का दावा है कि लेमिनेशन टेंडर न होने के कारण कार्ड बन नही पा रहा है।
केजीएमयू का आईटी सेल पहले मरीजों को पंजीकरण कराने के साथ ही बार कोड कार्ड देता था, जो कि लेमिनेशन युक्त होता था आैर मरीज उससे कही भी जांच या अन्य जानकारी ले सकता था, पर कई महीनों से लेमिनेशन का टेंडर व कार्ड समाप्त हो जाने के के कारण मरीज को एक कागज के टुकड़े पर बार कोड चिपका कर दे दिया जाता है। इसके अलावा एक रुपये पर्चा पर भी बार कोड चिपकाया जाता है,जिसमें मरीज का नाम भी लिखा होता है। ऐसे में अक्सर दूसरा पर्चा बनवाने के दौरान अगर कागज के टुकड़े पर दर्ज बार कोड नहीं मिलता है आैर पहला पर्चा भी लेकर नही ं आया है तो मरीज का दूसरे डाक्टर की ओपीडी का पर्चा बनना नामुमिकन है।
मरीजो का कहना है कि पंजीकरण के नाम पर तो पचास रुपये ले लिया जाता है लेकिन कार्ड नहीं मिलता है। ऐसे में आये दिन ओपीडी के पर्चा काउंटर मरीजों को हंगामा करते देखा जा सकता है। आई सेल के डा. संदीप भट्टाचार्य का कहना है कि बार कोड कार्ड का लेमिनेशन करने का टेंडर हो रहा है। इस लिए एक कागज के टुकड़े पर बार कोड चिपका कर दे दिया जाता है। मरीज को दिक्कत से बचाने के लिए एक रुपये के पर्चा पर दूसरा बार कोड भी लगा दिया जाता है, जिसमें मरीज का नाम भी दर्ज होता है।
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