नियमों को ताक पर रखकर प्रयोगशाला सहायक ग्राम को दे दी तैनाती

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Photo Source: http://www.ahaliaayurvedics.org/images/gallery/blood.jpg

लखनऊ। राजधानी समेत प्रदेश के जनपदीय अस्पतालों व मेडिकल कालेजों की ब्लड बैंक व पैथालॉजी का कामकाज इन दिनों प्रयोगशाला सहायक (ग्राम) के भरोसे है। पैथालॉजी में स्लाइड बनाने से लेकर सै पल कलेक्शन व ब्लड बैंक में डोनर की स्क्रीनिंग का लैब टैक्नीशियन, लैब असिस्टैंट,मेडिकल लेब्रोट्री टैक् नीशियन (एमएलटी) के बजाए प्रयोगशाला सहायक ग्राम लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर लोगों के साथ खिलबाड़ किया जा रहा हैं। जो कि चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशालय के शासनादेन पत्रांक सं या सी. — तहत जनहित को ध्यान में रखते हुए सार्टिफिकेट धारक ब्लड बैंक व जिला अस्पतालों की पैथालॉजी में तैनात नहीं किए जा सकते।

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ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट-1940 खण्ड जी (3) व (4) के अंतर्गत ब्लड बैंकों में तैनात किए जाने वाले टैक्नीशियन, लैब असिस्टैंट,की योग्यता का निर्धारण किया गया है। निर्धारित नियमानुसार ब्लड बैंक में तैनात किए जाने वाले टैक्नीशियन, लैब असिस्टैंट व एमएलटी योग्यता इसके तहत मान्य है। प्रयोगशाला सहायक (ग्राम) का छह माह का सार्टिफिकेट कोर्स इसके लिए मान्य नहीं है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों ने नियम कानून को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से प्रयोगशाला सहायक (ग्राम) को प्रदेश के जिला अस्पतालों में ब्लड बैंकों से लेकर पैथालॉजी में तैनाती दे दी।

जहां अधिकारी अपने चहेतों को तैनाती नहीं दे सके, उन्होंने वहां प्रयोगशाला सहायक (ग्राम)को अटैच कर दिया। जिसमें राजधानी के बलरामपुर, सिविल और लोहिया अस्पताल से लेकर प्रदेश के आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया के जिला अस्पताल व मेडिकल कालेजों के ब्लड बैंक प्रमुख रूप से शामिल हैं। जहां नियम कानून को ताक पर रखकर स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर लोगों के जान-माल से खिलबाड़ हो रहा है।

सीएचसी-पीएचसी में सालों से रिक्त पड़े प्रयोगशाला सहायक के पद-

स्वास्थ्य महानिदेशाल की ओर से एक साल पहले करीब 150 प्रयोग शाला सहायक ग्राम की नियुक्ति की गई थी। जिन्हें ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट-1940 के नियम विरूद्घ जिला अस्पताल, मेडिकल कालेज के ब्लड बैंक और पैथालॉजी में तैनाती दे दी गई। जबकि राजधानी समेत प्रदेश भर के ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केेंद्रों में लैब असिस्टेंट व प्रयोगशाला सहायक के सृजित पद सालों से रिक्त पड़े। जिसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

डॉ. पदमाकर सिंह, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं

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