डेस्क। केरल के कोझिकोड जिले में रहस्यमय और अत्यंत घातक’ निपाह”वायरस की चपेट में आने से 10 लोगों के मरने के सूचना के बाद केन्द्र सरकार सतर्क हो गयी है। बताया जाता है कि इस जानलेवा वायरस से पीड़ति छह लोगों के चपेट में आने हालत नाजुक है और 25 पीड़ित लोगों गहन निगरानी में रख कर मानीटरिंग की जा रही है। निपाह से मौतों की खबर के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय हाई अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रसाद नड्ढा ने ट््िवटर पर जानकारी दी कि केरल में निपाह वायरस से होने वाली मौतों के बाद उत्पन्न स्थिति पर स्वास्थ्य सचिव से वार्ता की है ।
श्री नड्डा ने कहा कि स्थिति की समीक्षा के बाद डाक्टरों की एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दे दिये गए हैं। एनसीडीसी के निदेशक की देखरेख में एक विशेषज्ञों की टीम केरल पहुंच चुका है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय गंभीरता से देखते केरल सरकार के स्वास्थ्य विभाग से बराबर संपर्क है। केरल के कोझिकोड जिले में इसविषाणु से होने वाली मौतों के मामले का जायजा लेने के लिए नेशनल सेंटर फार डिजीज कंट्रोल(एनसीडीसी) के निदेशक सुरजीत के सिंह की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय केन्द्रीय टीम ने कोझिकोड मेडिकल कालेज का आज दौरा किया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार केन्द्रीय टीम इस क्षेत्र में विषाणु के प्रसार के बारे में जानकारी हासिल करने और सरकार को इस स्थिति से निपटने में मदद करने के लिए आई है। इससे पहले राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के के शैलेजा ने टीम से मुलाकात कर सरकार की आैर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। राज्य सरकार के प्रयासों का अध्ययन करने के बाद टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी। इस बीच इस क्षेत्र में निपाह विषाणु के संक्रमण से ग्रस्त होने की एक और व्यक्ति में पुष्टि हो गई है। अब तक इस विषाणु की चपेट में आकर पेराम्बका तालुक अस्पताल की स्टाफ नर्स समेत चार लोगों की मौत हो गई है लेकिन चर्चा है कि इस वायरस से मौत का आंकड़ा 12 बताया जा रहा है।
इस बारे में किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के माइक्रोबायलॉजी विभाग की वरिष्ठ डा. शीतल का कहना है कि खतरनाक वायरस होने के कारण इसे ग्रुप फोर में रखा गया है। इस बीमारी के लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और बेहाशी भी आ जाती है। शोध के अनुसार यह वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। एक विशेष तरह का चमगादड़ जिसे फ्रूट बैट भी कहते हैं जो मुख्य तौर से फल के रस का सेवन के अलावा अगर कही स्लाइवा भी लगा रह जाता है, तो भी यह तेजी से फैलता है। इस वायरस मल के द्वारा भी फैलना बताया गया है। विशेषज्ञों की माने तो निपाह को एनआईवी इंफेक्शन भी कहा जाता है।
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